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अली खामेनेई की प्रार्थना सभा में नहीं नजर आए उत्तराधिकारी मोजतबा

तेहरान, 05 जुलाई । अमेरिका-इजराइल के एकीकृत सैन्य अभियान में इस वर्ष 28 फरवरी को मारे गए ईरान के सर्वोच्च नेता 86 वर्षीय अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम समारोह की रस्में शुरू हो चुकी हैं। रविवार को प्रार्थना सभा में लाखों लोगों ने हिस्सा लिया। दिवंगत सर्वोच्च नेता के तीन बेटे मसूद, मुस्तफा और मेसम जरूर इस मौके पर मौजूद रहे, लेकिन अली खामेनेई के उत्तराधिकारी और उनके पुत्र मोजतबा खामेनेई इस दौरान नजर नहीं आए। सारी दुनिया की निगाह मोजतबा के सार्वजनिक रूप से सामने आने पर लगी हुई हैं।

अरब न्यूज, अल जजीरा, गल्फ न्यूज और सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के प्रमुख अहमद वाहिदी सोमवार को ग्रैंड मोसाला पहुंचे। उन्होंने अली खामेनेई के अंतिम संस्कार समारोह के दूसरे दिन शोक मनाने वालों के साथ प्रार्थना सभा में हिस्सा लिया। उम्मीद थी कि वाहिदी के साथ देश सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई भी पहुंच सकते हैं, मगर ऐसा नहीं हुआ। ईरान में रविवार को सार्वजनिक अवकाश घोषित किया गया। आज तेहरान में जुलूस निकला है। खामेनेई के पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए रखा गया है।

खामेनेई के उत्तराधिकारी मोजतबा खामेनेई के बारे में कहा जाता है कि वह 28 फरवरी के हमले में घायल हुए हैं। सर्वोच्च नेता नामित होने के बाद से वह अब तक सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आए हैं। खामेनेई के ताबूत को मंगलवार को खोम और फिर बुधवार को पड़ोसी देश इराक ले जाया जाएगा।गुरुवार को उत्तर-पूर्वी गृहनगर मशहद में उन्हें दफनाया जाएगा। कयास लगाए जा रहे हैं कि मशहद में इस अवसर पर मोजतबा सामने आ सकते हैं।

तेहरान के ग्रैंड मोसाला कॉम्प्लेक्स में रविवार की प्रार्थना सभा का नेतृत्व प्रमुख शिया धर्मगुरु जाफर सोभानी ने किया। 97 वर्षीय सोभानी पवित्र शहर कोम के धार्मिक स्कूलों में पढ़ाते हैं। ईरानी झंडे में लिपटे और काली पगड़ी से ढके खामेनेई के ताबूत को फरवरी के हमलों में मारे गए चार रिश्तेदारों के ताबूतों के साथ रखा गया।

ईरान की अर्ध सरकारी तस्नीम समाचार एजेंसी के अनुसार, स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है कि दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार समारोह की रस्मों में लगभग 1.5 करोड़ लोगों के शामिल होने की उम्मीद है। मंत्रालय ने कहा कि तेहरान में इमाम खुमैनी ग्रैंड मोसाला के पास अस्थायी अस्पताल बनाए गए हैं। यहां खामेनेई और उनके परिवार के कई सदस्यों के ताबूत रखे गए हैं।

मंत्रालय ने कहा कि कोम और मशहद में अंतिम संस्कार समारोह की तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। 1939 में मशहद में जन्मे खामेनेई कम उम्र में ही शिया मुस्लिम धर्मगुरु बन गए थे। उन्होंने ईरान के शाह मोहम्मद रजा पहलवी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। इसके लिए उन्हें जेल भी जाना पड़ा। 1981 में उन पर जानलेवा हमला हुआ, जिसमें उनका दाहिना हाथ बेकार हो गया।

इसके कुछ ही समय बाद उन्हें राष्ट्रपति चुना गया। उनका रवैया अमेरिका के प्रति बेहद सख्त रहा है। वह ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला रूहोल्लाह खुमैनी के करीबी सहयोगी थे। खुमैनी ने ही शाह को सत्ता से हटाने के संघर्ष का नेतृत्व किया था और इस्लामिक रिपब्लिक की स्थापना की थी। 1989 में खुमैनी के निधन के कुछ ही हफ्तों के भीतर खामेनेई उनके उत्तराधिकारी बन गए थे।