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शिवपुरीः नरवर किले की 400 साल पुरानी तोप चोरी मामले में गार्डों की झूठी कहानी बेनकाब

शिवपुरी, 18 जुलाई । मध्य प्रदेश में शिवपुरी जिले के ऐतिहासिक नरवर किले से 16वीं शताब्दी की करीब 3,500 किलोग्राम वजनी दुर्लभ तोप चोरी होने के मामले में जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे कई चौंकाने वाले खुलासे सामने आ रहे हैं।

राज्य पुरातत्व विभाग और पुलिस की संयुक्त जांच टीम को घटनास्थल से ऐसे अहम साक्ष्य मिले हैं, जो इस वारदात के पीछे किसी संगठित अंतरराष्ट्रीय एंटीक तस्कर गिरोह की ओर इशारा कर रहे हैं। सबसे बड़ा खुलासा यह हुआ है कि वारदात की रात किले की सुरक्षा में तैनात दोनों गार्ड ड्यूटी छोड़कर अपने-अपने घर चले गए थे और हथियारबंद बदमाशों द्वारा लूट की जो कहानी सुनाई गई थी, वह पूरी तरह झूठी निकली।

घटनास्थल से मिले अहम सुराग

संयुक्त जांच टीम को किले से गद्दे, रजाई, लोहे के पाइप, तोप को घसीटकर ले जाने के निशान तथा किले के पिछले दुर्गम रास्ते पर वाहन के टायरों के निशान मिले हैं। इन साक्ष्यों से स्पष्ट है कि वारदात को बेहद सुनियोजित तरीके से अंजाम दिया गया। पुलिस अब घटनास्थल से मिले सभी भौतिक साक्ष्यों की फॉरेंसिक जांच कर रही है और चोरी में इस्तेमाल किए गए वाहन की पहचान में जुटी है।

गार्डों ने मानी लापरवाही, झूठी निकली लूट की कहानी

सुरक्षा गार्ड बालकिशन वाल्मीकि ने जांच में स्वीकार किया कि किले पर रात में रुकने की कोई व्यवस्था नहीं थी। न टॉर्च उपलब्ध थी और न अन्य सुरक्षा संसाधन, इसलिए वह रात में घर चला गया। वहीं दूसरे गार्ड शरणलाल जाटव ने भी माना कि वह घटना के समय ड्यूटी पर मौजूद नहीं था। उसने यह भी स्वीकार किया कि हथियारबंद बदमाशों द्वारा लूट की जो कहानी पुलिस को बताई गई थी, वह झूठी थी।

पहले भी हुई थी चोरी की कोशिश

जांच में यह भी सामने आया है कि 4-5 जुलाई की रात बदमाशों ने इसी तोप को उसके स्थान से नीचे गिरा दिया था, लेकिन अत्यधिक वजन होने के कारण उसे ले जाने में सफल नहीं हो सके। सुरक्षा गार्डों ने इसकी सूचना नरवर थाने में दी थी, लेकिन मामले को गंभीरता से नहीं लिया गया। इसके बाद तस्कर पूरी तैयारी के साथ 15-16 जुलाई की रात लौटे और बेयरिंग लगी लोहे की ट्रॉली की मदद से तोप को करीब तीन हजार फीट नीचे उतारकर वाहन में लादकर फरार हो गए।

छह गार्ड तैनात, फिर भी हो गई चोरी

नरवर किले की सुरक्षा के लिए कुल छह गार्ड तैनात हैं, जिनमें चार दिन और दो रात की ड्यूटी करते हैं। लेकिन घटना की रात दोनों रात्रि गार्ड अनुपस्थित रहे, जिससे चोरों को बिना किसी रोक-टोक के कई घंटे तक वारदात को अंजाम देने का मौका मिल गया।

पुरातत्व विभाग और पुलिस ने क्या कहा

राज्य पुरातत्व विभाग के डिप्टी डायरेक्टर तरुण कुमार महोबिया ने कहा कि ऐतिहासिक तोप चोरी होने के पर्याप्त साक्ष्य मिले हैं। पुलिस के साथ संयुक्त जांच जारी है और सुरक्षा व्यवस्था की भी समीक्षा की जाएगी।

वहीं नरवर थाना प्रभारी विनय यादव ने बताया कि जांच में सुरक्षा गार्डों की गंभीर लापरवाही सामने आई है। अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर उनकी तलाश की जा रही है। घटनास्थल से मिले साक्ष्यों के आधार पर चोरी में शामिल वाहन और आरोपियों तक पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है।

अब किले में बचीं सिर्फ 13 ऐतिहासिक तोपें

नरवर किले की ओपन कचहरी में सिंधिया राजवंश काल की 14 दुर्लभ ऐतिहासिक तोपें रखी थीं। इस चोरी के बाद अब वहां केवल 13 तोपें बची हैं। चोरी हुई तोप करीब 5 फीट 10 इंच लंबी और 30 इंच चौड़ी बताई गई है। यह पीतल, तांबा, कांसा और अष्टधातु जैसी मिश्रित धातुओं से निर्मित थी, जिस पर फारसी और देवनागरी लिपि में शिलालेख अंकित हैं। विशेषज्ञों के अनुसार अंतरराष्ट्रीय अवैध एंटीक बाजार में इस दुर्लभ तोप की कीमत दो से पांच करोड़ रुपये तक हो सकती है।