Rajasthan

‘हम भारत के लोग’ की गूंज लेकर राजस्थान निकली ‘लोक दर्शन यात्रा’

जयपुर, 01 सितंबर । भारतीय चिंतन, लोक परंपराओं और राष्ट्रीय एकात्मता की खोज को लेकर राजस्थान में एक अनूठी वैचारिक यात्रा का आगाज हुआ है। राष्ट्रीय विचार कुंभ ‘लोकमंथन-2026’ के पूर्व अभियान के तहत मंगलवार को जयपुर स्थित लोकमंथन कार्यालय से ‘लोक दर्शन यात्रा’ रवाना हुई। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के राजस्थान क्षेत्र प्रचारक निंबारामजी ने यात्रा रथ को पताका दिखाकर प्रदेशभर में जन-जागरण के लिए रवाना किया।

इस वर्ष लोकमंथन का केंद्रीय विषय ‘हम भारत के लोग’ रखा गया है। इसी विचार को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के उद्देश्य से शुरू हुई यह यात्रा राजस्थान के विभिन्न जिलों, गांवों और अंचलों में पहुंचेगी। यात्रा के दौरान स्थानीय लोककला, संस्कृति, लोकज्ञान और परंपराओं को करीब से जानने के साथ उन लोक साधकों, कलाकारों और युवाओं को भी मंच से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा, जो अपने-अपने क्षेत्र में भारतीय संस्कृति की परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं।

यात्रा के शुभारंभ अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि भारत की शक्ति केवल उसके बड़े शहरों में नहीं, बल्कि गांवों के लोकजीवन, ग्राम्य व्यवस्था और सांस्कृतिक विविधता में भी दिखाई देती है। ‘हम भारत के लोग’ संविधान की प्रस्तावना में दर्ज शब्द भर नहीं, बल्कि भारत की हजारों वर्ष पुरानी सभ्यतागत एकात्मता और सामूहिक शक्ति का परिचायक है। ‘लोक दर्शन यात्रा’ इसी भावना को प्रदेश के कोने-कोने तक पहुंचाने का माध्यम बनेगी।

आयोजकों के अनुसार यात्रा के माध्यम से दिसंबर में जयपुर में होने वाले मुख्य आयोजन के लिए व्यापक वैचारिक और सांस्कृतिक वातावरण तैयार किया जाएगा। विशेष रूप से सुदूर अंचलों में सक्रिय लोक कलाकारों, साधकों और युवाओं को सामने लाकर उनकी प्रतिभा और लोक परंपराओं से देश-दुनिया को परिचित कराने की पहल की जाएगी।

‘प्रज्ञा प्रवाह’ के वैचारिक अधिष्ठान और मार्गदर्शन में आयोजित लोकमंथन इससे पहले भोपाल (2016), रांची (2018), गुवाहाटी (2022) और हैदराबाद (2024) में आयोजित हो चुका है। इसी श्रृंखला का पांचवां राष्ट्रीय आयोजन 4, 5 और 6 दिसंबर 2026 को जयपुर के जवाहर कला केंद्र में प्रस्तावित है। इसमें देशभर के विचारक, शोधकर्ता, कलाकार और लोक साधक एक साझा मंच पर भारतीय चिंतन और लोक परंपराओं से जुड़े विषयों पर विचार-विमर्श करेंगे।

‘लोक दर्शन यात्रा’ के शुभारंभ कार्यक्रम में आयोजन समिति के पदाधिकारी और वैचारिक समूहों से जुड़े कार्यकर्ता उपस्थित रहे। यात्रा के साथ अब राजस्थान के लोकजीवन और उसकी सांस्कृतिक विरासत को करीब से जानने का सिलसिला शुरू हो गया है।