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उज्जैन: महाकाल ने धारण किया रजत चंद्र-त्रिशूल और मुकुट, भांग-चंदन से हुआ दिव्य श्रृंगार

उज्जैन, 02 अक्टूबर । मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में शुक्रवार तड़के भस्म आरती विधि-विधान से संपन्न हुई। आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि पर भगवान महाकाल का पंचामृत अभिषेक कर भांग, चंदन और भस्म से विशेष श्रृंगार किया गया। भगवान को रजत चंद्र, त्रिशूल, मुकुट, मुण्डमाल और अन्य आभूषण अर्पित किए गए। भस्म आरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दर्शन कर आशीर्वाद लिया।

भस्म आरती की शुरुआत सभा मंडप में वीरभद्र जी के कान में स्वस्ति वाचन से हुई। इसके बाद प्रथम घंटाल बजाकर भगवान से आज्ञा ली गई और सभा मंडप के चांदी के पट खोले गए। गर्भगृह के पट खुलने के बाद पुजारियों ने भगवान महाकाल का श्रृंगार उतारकर पूजन-अभिषेक की प्रक्रिया शुरू की। कर्पूर आरती के बाद भगवान का जलाभिषेक किया गया।

नंदी हॉल में नंदी महाराज का स्नान, ध्यान और पूजन किया गया। इसके बाद भगवान महाकाल का जल से अभिषेक किया गया। दूध, दही, घी, शक्कर, शहद और फलों के रस से तैयार पंचामृत से अभिषेक-पूजन हुआ। भस्म अर्पण से पहले मंत्रोच्चार के साथ भगवान का ध्यान किया गया। ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से ढंककर विधि-विधान से भस्म अर्पित की गई। भस्म आरती के दौरान महा निर्वाणी अखाड़े की ओर से भगवान महाकाल को भस्म अर्पित की गई। धार्मिक मान्यता के अनुसार भस्म अर्पण के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं।

भस्म अर्पण के बाद भगवान महाकाल का आकर्षक श्रृंगार किया गया। उन्हें शेषनाग का रजत मुकुट, रजत मुण्डमाल, रजत चंद्र, त्रिशूल, रुद्राक्ष की माला और सुगंधित पुष्पों की मालाएं अर्पित की गईं। भांग और चंदन से श्रृंगार कर फल व मिष्ठान का भोग लगाया गया। आभूषणों और पुष्पों से सजे बाबा महाकाल के साकार स्वरूप के श्रद्धालुओं ने दर्शन किए।

भस्म आरती में सैकड़ों श्रद्धालु मौजूद रहे। श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दर्शन के साथ नंदी महाराज का पूजन किया और उनके कान के समीप अपनी मनोकामना व्यक्त की। इस दौरान मंदिर परिसर बाबा महाकाल के जयकारों से गूंजता रहा।