खाटूश्यामजी नगर पालिका अध्यक्ष पद के चुनाव को लेकर एकलपीठ के आदेश में दखल से इनकार, अपीलें खारिज
जयपुर, 03 अक्टूबर । राजस्थान हाईकोर्ट ने खाटूश्यामजी नगर पालिका अध्यक्ष पद के लिए 21 सितंबर को दोपहर दो बजे तक डाले गए मतों के आधार पर मतगणना करने के संबंध में एकलपीठ की ओर से दिए आदेश में दखल से इनकार कर दिया है। इसके साथ ही अदालत ने मामले में दायर अपीलों को खारिज कर दिया है। सीजे संजय के. अग्रवाल और जस्टिस समीर जैन की खंडपीठ ने यह आदेश राज्य निर्वाचन आयोग व लक्ष्मी कुमारी की ओर से दायर अपीलों पर संयुक्त रूप से सुनवाई करते हुए दिए।
अदालत ने कहा कि संविधान के प्रावधानों के अनुसार एक बार निर्वाचन आरंभ होने के बाद उसे तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचने दिया जाना चाहिए। निर्वाचन की परिभाषा में परिणाम घोषित होने तक की प्रक्रिया शामिल होती है। इसके अलावा एकलपीठ ने भी इस निर्वाचन की वैधता पर अपना अंतिम निर्णय नहीं किया है और व्यथित पक्षकार को परिणाम के बाद चुनाव याचिका दायर करने की छूट दी है। ऐसे में इस संबंध में दायर अपीलों को खारिज किया जाता है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि आयोग के गत 22 सितंबर के आदेश की वैधता, 25 सितंबर को संबंध मतदान और अपीलार्थी के कथित अपहरण संबंधी बयानों पर कुछ नहीं कहा जा रहा है। इन सभी प्रश्नों को सक्षम मंच के समक्ष उठाने के लिए छोड़ा जा रहा है।
अपील में वरिष्ठ अधिवक्ता आरके अग्रवाल सहित अन्य ने कहा कि अपीलार्थी के अपहरण को लेकर दर्ज एफआईआर के चलते आरओ ने 22 सितंबर को आदेश जारी कर 25 सितंबर को मतदान कराना तय किया। वहीं इसे चुनौती देते हुए दायर याचिका में एकलपीठ ने 21 सितंबर को डाले गए मतों के आधार पर ही परिणाम जारी करने के आदेश दे दिए। अपील में कहा गया कि एकलपीठ के समक्ष पालिका अध्यक्ष पद की उम्मीदवार अपीलार्थी लक्ष्मी कुमारी को पक्षकार नहीं बनाया गया। वहीं निर्वाचन प्रक्रिया आरंभ होने के बाद एकलपीठ को इसमें दखल नहीं देना चाहिए था। जिसका विरोध करते हुए एकलपीठ की याचिकाकर्ता विनीता पूनिया की ओर से कहा गया कि एकलपीठ ने निर्वाचन प्रक्रिया में हस्तक्षेप नहीं किया। एकलपीठ ने सिर्फ निर्वाचन प्रक्रिया की पूर्णता के लिए निर्धारित समय सारिणी को बनाए रखा है। इसके अलावा एकलपीठ ने चुनाव परिणाम को उचित मंच पर चुनौती देने की भी छूट दी थी। दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद अदालत ने अपीलों को खारिज कर दिया है।

