Rajasthan

एनसीआर के पांच जिलों में वायु प्रदूषण नियंत्रण की समीक्षा, यातायात प्रबंधन का रोडमैप बनाने के निर्देश

जयपुर/भरतपुर, 05 अक्टूबर । मुख्य सचिव वी. श्रीनिवासन ने एनसीआर क्षेत्र में वायु गुणवत्ता सुधार के लिए विभागीय प्रयासों में निरंतरता, बेहतर समन्वय और परिणाम आधारित निगरानी के साथ जनजागरूकता बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि वायु प्रदूषण नियंत्रण केवल किसी एक विभाग की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि संबंधित विभागों, स्थानीय निकायों और आमजन के समन्वित प्रयास से ही स्थायी परिणाम हासिल किए जा सकते हैं।

मुख्य सचिव सोमवार को भरतपुर कलेक्ट्रेट में भरतपुर, अलवर, डीग, खैरथल-तिजारा और कोटपूतली-बहरोड़ जिलों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन एवं प्रदूषण नियंत्रण कार्यों की समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने धूल, वाहनों एवं उद्योगों से होने वाले उत्सर्जन, निर्माण गतिविधियों तथा कचरे से होने वाले प्रदूषण की रोकथाम के कार्य निर्धारित समय सीमा में पूरा करने के निर्देश दिए।

श्रीनिवासन ने कहा कि वायु प्रदूषण नियंत्रण के प्रयासों का असर धरातल पर दिखाई देना चाहिए। उन्होंने एनसीआर क्षेत्र के रीको औद्योगिक क्षेत्रों में सड़क निर्माण और क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत में तेजी लाने के निर्देश दिए। बड़े शहरों और कस्बों में यातायात प्रबंधन के लिए जिला कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक और यातायात अधिकारियों के समन्वय से ठोस रोडमैप तैयार करने को कहा। उन्होंने प्रमुख मार्गों पर जाम की समस्या के समाधान के लिए ट्रैफिक डिजाइन तैयार करने तथा मैकेनिकल रोड स्वीपर मशीनों की जीपीएस आधारित नियमित निगरानी के निर्देश दिए। शहरी क्षेत्रों में सड़क सफाई व्यवस्था पर भी विशेष ध्यान देने को कहा।

मुख्य सचिव ने पुराने और अधिक प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों के चरणबद्ध प्रतिस्थापन के लिए आमजन को जागरूक करने के निर्देश दिए। उन्होंने एनसीआर क्षेत्र में ‘नो पीयूसीसी-नो फ्यूल’ व्यवस्था के लिए चिन्हित पेट्रोल पंपों पर एएनपीआर कैमरा प्रणाली लगाने की प्रगति की जानकारी ली और वाहन प्रदूषण संबंधी उल्लंघनों पर प्रभावी कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने नगर निकाय, सार्वजनिक निर्माण विभाग, भरतपुर विकास प्राधिकरण और रीको क्षेत्रों में 80 किलोमीटर से अधिक सड़क निर्माण कार्यों में तेजी लाने को कहा। कृषि विभाग के अधिकारियों से आधुनिक कृषि यंत्रों की उपलब्धता की जानकारी लेते हुए 26 कस्टम हायरिंग सेंटर और डीग में 55 क्रॉप रेजीड्यू मशीनों के निर्धारित लक्ष्य पूरे करने के निर्देश दिए।

भरतपुर कलेक्टर कमर चौधरी ने बताया कि जिले में पीएम-10 का स्तर 164 से घटकर 78 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर और वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 152 से घटकर 78 हुआ है। उन्होंने बताया कि शहर में विभिन्न विकास कार्य जारी हैं, जिनके पूरा होने के बाद सड़क की धूल से होने वाले प्रदूषण में और कमी आने की संभावना है। भरतपुर में दो मैकेनिकल रोड स्वीपर संचालित किए जा रहे हैं। नगला लोधा स्थित लिगेसी वेस्ट साइट पर 99 हजार मीट्रिक टन कचरे का निस्तारण किया जा चुका है।

प्रादेशिक परिवहन अधिकारी ने बताया कि परिवर्तन योजना के तहत भरतपुर में 241, अलवर में 221 और भिवाड़ी में 77 वाहनों का पंजीकरण किया गया है।

अलवर कलेक्टर डॉ. आर्तिका शुक्ला ने बताया कि जिले में सड़क विकास, मैकेनिकल स्वीपिंग, हरित क्षेत्र विकास, यातायात प्रबंधन और कचरा निस्तारण के माध्यम से प्रदूषण कम करने के प्रयास किए जा रहे हैं। अलवर में पीएम-10 का स्तर 127 से घटकर 108 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर हुआ है। नगर निगम की ओर से आठ मैकेनिकल रोड स्वीपर संचालित किए जा रहे हैं। गोलेटा लिगेसी वेस्ट साइट पर 89,872 टन कचरे का निस्तारण किया गया है।

खैरथल-तिजारा कलेक्टर अतुल प्रकाश ने बताया कि सड़क धूल नियंत्रण के लिए आठ मैकेनिकल रोड स्वीपिंग मशीनें संचालित हैं और सात नई मशीनों के लिए कार्यादेश जारी किए गए हैं। भिवाड़ी की 224 औद्योगिक इकाइयों में से 210 को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के सर्वर से जोड़ा जा चुका है। भिवाड़ी के लिए 15 ई-बस प्रस्तावित हैं और ईवी चार्जिंग स्टेशन विकसित किए जा रहे हैं।

कोटपूतली-बहरोड़ कलेक्टर अपर्णा गुप्ता ने बताया कि सड़क किनारे खाली जमीन के पक्कीकरण, इंटरलॉकिंग और हरित पट्टियों के विकास के माध्यम से सड़क धूल को नियंत्रित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। नीमराना में मैकेनिकल स्वीपिंग व्यवस्था मजबूत करने के लिए सात मध्यम आकार की मशीनों के कार्यादेश जारी किए गए हैं।

बैठक में भरतपुर पुलिस अधीक्षक राजेश कुमार मीणा सहित संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।