ऑनर किलिंग के आरोपी पिता की फांसी की सजा हाईकोर्ट ने रद्द की, अन्य आरोपी परिजन भी हुए बरी
जयपुर, 30 अक्टूबर । राजस्थान हाईकोर्ट की खंडपीठ ने 2019 में सीकर के चर्चित ऑनर किलिंग मामले में आरोप साबित नहीं होने और साक्ष्यों की कड़ी नहीं जुड़ने के चलते बेटी और प्रेमी की हत्या के आरोपी पिता रामगोपाल को निचली कोर्ट से सुनाई फांसी की सजा का 30 नवंबर 2024 का आदेश रद्द कर दिया। वहीं मामले में अन्य आरोपी परिजनों संदीप गुर्जर, नंदलाल, महेन्द्र कुमार चौधरी, मदनलाल चंडीवाल, बाबूलाल उर्फ हरनेक, बीरबल ढाका, सोहनलाल, महादेव एवं परसराम की भी उम्रकैद की सजा रद्द कर बरी कर दिया। जस्टिस महेन्द्र कुमार गोयल व जस्टिस भुवन गोयल की खंडपीठ ने यह आदेश आरोपियों की अपीलों को स्वीकार करते हुए दिया।
हाईकोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष परिस्थितिजन्य साक्ष्य की ऐसी पूरी अखंड श्रृंखला स्थापित नहीं कर सका है जिससे कि आरोपियों को मामले में दोषी ठहराया जा सके। ऐसे में हाईकोर्ट आरोपियों के संबंध में निचली कोर्ट के निष्कर्ष से सहमत नहीं है। अभियोजन आरोपियों के खिलाफ अपराध को साबित करने में फेल रहा है। ऐसे में निचली कोर्ट के आरोपियों को सुनाई गई सजा के आदेश को रद्द करना उचित होगा। आरोपियों की ओर से सीनियर एडवोकेट वीआर बाजवा, अधिवक्ता राजेश गोस्वामी व रजनीश गुप्ता सहित अन्य अधिवक्ताओं ने पैरवी की।
आरोपियों ने कहा कि निचली कोर्ट का निर्णय केवल अटकलों एवं अनुमानों पर आधारित हैं और रिकार्ड पर किसी भी साक्ष्य से उनके खिलाफ अपराध साबित नहीं है। अभियोजन की ओर से वास्तविक घटनाक्रम को छिपाया है। अभियोजन का मामला परिस्थितिजन्य साक्ष्य पर आधारित है, लेकिन वह एक अखण्ड श्रृंखला साबित करने में असफल रहा है।
परिवादी बलदेव गोदारा ने 23 अक्टूबर 2019 को रानोली पुलिस थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि पिछली रात करीब 11.16 बजे नामजद लोगों सहित अज्ञात लोगों ने उसके भाई गणपत लाल को पलसाना बाईपास पर बुलाया था। वहां उसके साथ मारपीट की और उसे एक वाहन में डालकर ले गए। बाद में पुलिस ने अनुसंधान के दौरान गणपत लाल के साथ ही प्रेम नामक एक महिला का शव भी बरामद हुआ। मामले में रामगोपाल पर आरोप था कि उसे बेटी के प्रेमी से संबंधों की भनक लग गई थी। उसने 21 अक्टूबर को बेटी की पिटाई की और गणपत को बुलवाया। बाद में उसका किडनैप कर लिया और दोनों के साथ बेरहमी से मारपीट की थी। इस दौरान दोनों की मौत हो गई। शवों को रामगोपाल ने गाड़ी में डालकर जीणमाता-मांडोली की पहाड़ियों में फेंक दिया था। बाद में रामगोपाल ने खाटूश्यामजी थाने में बेटी की गुमशुदगी रिपोर्ट दर्ज करवाई थी।
डीजीपी इलेक्ट्रोनिक साक्ष्यों के संग्रहण व संरक्षण के लिए दो महीने में एसओपी बनाएं:
हाईकाेर्ट ने मामले में सुनवाई करते हुए कहा कि ज्यादातर जांच अधिकारी और पर्यवेक्षी अधिकारी इलेक्ट्रॉनिक सबूतों को इकट्ठा करने, जब्त करने, सुरक्षित रखने और उन्हें अदालत में साबित करने की प्रक्रिया से अनजान हैं। ऐसे में डीजीपी दो महीने में इलेक्ट्रॉनिक सबूतों को इकट्ठा करने, जब्त करने, सुरक्षित रखने और साबित करने के संबंध में एक एसओपी बनाएं। इसमें सीसीटीवी फुटेज व कॉल डिटेल रिकार्ड की जानकारी ‘भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023’ और ‘भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023’ में दिए गए कानूनी प्रावधानों के अनुसार हो।


