“गोविंदा भी चख चुके वृंदावन का ‘बदनाम’ चीला, जानें क्यों कहते हैं ‘बदनाम चाटवाला'”
**वृंदावन का बदनाम चीला: एक नई पहचान की कहानी**
मथुरा के वृंदावन में खाने-पीने की अनेक खासियतें हैं, जिसमें कचौड़ी, समोसा और पेड़ा प्रमुख हैं। लेकिन इस समय यहां की एक नई डिश ने सभी का ध्यान खींचा है, जिसे मूंग की दाल से बनाया जाता है। चूंकि बांके बिहारी मंदिर के आसपास चीला की कई दुकानें हैं, इनमें से एक दुकान ने एक अनोखी पहचान बनाई है – ‘बदनाम चीला’। यहां आने वाले ग्राहक इसकी विशेषता का आनंद लेने के लिए लंबी कतार में खड़े रहते हैं। वृंदावन आने वाले मेहमानों के लिए यह एक जरूरी अनुभव बन गया है। अभिनेता गोविंदा भी इस चीले का स्वाद ले चुके हैं, जिसके कारण दुकान का नाम ‘बदनाम’ रखा गया।
दुकान के मालिक सुशील गोस्वामी ने अपने व्यवसाय की कहानी साझा की है। उन्होंने बताया, “मेरी शादी एक साल से भी कम समय में टूट गई और पत्नी ने कहा था, ‘मैं तुम्हें बदनाम कर दूंगी।'” उस समय वह चाट का ठेला लगाते थे। पत्नी की बात को उन्होंने अपनाया और अपनी दुकान का नाम ‘बदनाम चाट वाला’ रखा। बदनाम चाट की यह दुकान बांके बिहारी मंदिर से केवल 50 मीटर दूर स्थित है और यहां diariamente बड़ी संख्या में ग्राहकों की भीड़ देखने को मिलती है। जो लोग मंदिर में दर्शन करने आते हैं, वे यहां चाट खाने की भी इच्छा जाहिर करते हैं।
चीला बनाने की प्रक्रिया बेहद रोचक है। एक किलो दाल से लगभग 30 चीला तैयार होते हैं, जिसमें लगभग दो घंटे का समय लगता है। इस डिश के स्वाद को बढ़ाने के लिए आलू का मसाला, खीरा, पत्ता गोभी और मटर जैसी सामग्री का प्रयोग किया जाता है। सुशील गोस्वामी का कहना है कि उनके व्यवसाय की सफलता का मुख्य कारण उनका नाम और स्वाद है। वे गुणवत्ता को हमेशा प्राथमिकता देते हैं और अपने मसालों की शुद्धता की गारंटी देते हैं।
सुशील ने बताया कि वह पिछले 30 साल से इस व्यवसाय में हैं और अपने ग्राहकों की संतुष्टि को अपनी प्राथमिकता मानते हैं। उनकी दुकान पर आने वाले ग्राहक एक अनोखे अनुभव का आनंद लेते हैं, जो स्वाद और गुणवत्ता दोनों को साथ लेकर चलता है। ‘बदनाम चीला’ केवल एक खाने की वस्तु नहीं है, बल्कि यह एक किस्म का अनुभव है जो वृंदावन की स्थानीय संस्कृति के साथ जुड़ा हुआ है।
इस प्रकार, वृंदावन का बदनाम चीला अपने अनोखे स्वाद और आकर्षक कहानी के कारण इस क्षेत्र की एक विशेष पहचान बनता जा रहा है। यहाँ के स्थानीय लोग और पर्यटक इसे अपनी यात्रा का अभिन्न हिस्सा मानते हैं। अगर आप भी वृंदावन जाने की योजना बना रहे हैं, तो इस खास चीले का स्वाद लेना न भूलें।

