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सनी देओल की गुगली: आर्ट को राजनीति से जोड़ना गलत, फवाद खान का स्वागत!

2016 में उरी हमले के बाद से भारत में पाकिस्तानी अभिनेताओं के प्रति विवाद की स्थिति पैदा हो गई थी, जिसके कारण कई फिल्मों में उनके कार्य पर प्रतिबंध लगा दिया गया। इस विवाद का सीधा असर फवाद खान पर भी पड़ा था, जिससे वह बॉलीवुड की दुनिया से दूरी बनाए हुए थे। हालांकि, अब फवाद खान एक बार फिर से बॉलीवुड में कदम रखने जा रहे हैं। उनकी आगामी फिल्म “अबीर गुलाल” का इंतजार किया जा रहा है, जो 9 मई को रिलीज होने जा रही है। फिल्म में फवाद खान के साथ अभिनेत्री वाणी कपूर भी मुख्य भूमिका में हैं।

फवादी ख़ान की वापसी को लेकर सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाएँ विभिन्नताओं से भरी हुई हैं। इस विशेष प्रोजेक्ट के बारे में और अधिक चर्चा उस समय बढ़ गई जब सनी देओल ने इस विषय पर अपने विचार व्यक्त किए। HT सिटी को दिए गए एक इंटरव्यू में सनी ने कहा, “मैं राजनीति में नहीं जाना चाहता, क्योंकि वहीं चीज़ें बिगड़ने लगती हैं। हम अभिनेता हैं, हमारे दर्शक दुनिया के हर कोने से हैं, और हमारा काम सबके लिए है।” उन्होंने यह भी बताया कि आज का समय ग्लोबल हो चुका है, और देशों के बीच तालमेल बढ़ाना चाहिए, जो कि एक सकारात्मक दृष्टिकोण है।

अमीषा पटेल ने भी इस मामले में फवाद खान के प्रति समर्थन व्यक्त किया है। उन्होंने कहा, “मैं पहले से ही फवाद खान की प्रशंसक हूँ। हमें हर अभिनेता और संगीतकार का स्वागत करना चाहिए। यह हमारी संस्कृति का हिस्सा है। कला को हम कला के रूप में देखते हैं, और इसमें भेदभाव नहीं होना चाहिए।” उनके इस वक्तव्य से यह स्पष्ट होता है कि फ़िल्म उद्योग में सामूहिकता और सहिष्णुता की भावना महत्वपूर्ण है, जिसमें सभी आर्टिस्ट का सम्मान हो।

सनी देओल की बात करें तो उनकी हाल ही में रिलीज हुई फिल्म “जाट” को अच्छे रिस्पॉन्स मिल रहे हैं। यह स्पष्ट है कि सनी ने भी दर्शकों के दिलों में एक खास स्थान बनाया हुआ है, और उनकी फिल्मों को लेकर लोगों में उत्साह बना रहता है।

फवाद खान की वापसी और सनी देओल का सकारात्मक दृष्टिकोण, दोनों ही भारतीय फिल्म उद्योग में एक नए बदलाव का प्रतीक हैं। दरअसल, यह सभी विभिन्नताओं के बीच एकता और सहिष्णुता का संदेश देते हैं। फिल्म “अबीर गुलाल” की रिलीज के साथ ही यह देखने की बात होगी कि क्या दर्शक फवाद खान की वापसी को सकारात्मक रूप में स्वीकार करते हैं या नहीं।