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3 हजार करोड़ का साम्राज्य मिट्टी में मिला, अतीक की खौफनाक अंत की दास्तान!

अतीक अहमद, जिनका जन्म एक साधारण गरीब परिवार में हुआ था, के जीवन की कहानी आदर्श से असाधारण बनने की है। उनके पिता, जो पहले तांगा चलाते थे, ने हमेशा उम्मीद की कि वह अपने बेटे को पढ़ाई के माध्यम से एक बेहतर जीवन दिलाएंगे। लेकिन अतीक की कहानी एक अलग मोड़ पर जा पहुंची जब उन्होंने शिक्षा को छोड़कर अपराध की दुनिया का रास्ता चुना। 1989 में मात्र 27 वर्ष की आयु में वह निर्दलीय विधायक बने, जिसके बाद उनके लिए सबकुछ बदल गया। उन्होंने तेज़ी से संपत्तियों का बड़ा साम्राज्य खड़ा कर लिया और 2020 तक आकर उनकी कुल संपत्ति 3000 करोड़ रुपए से भी अधिक हो गई थी। अतीक ने प्रयागराज सहित अन्य स्थानों पर होटल और कॉम्पलेक्स बनाए, लग्ज़री कोठियाँ खरीदीं और विदेशों में भी निवेश किया।

प्रयागराज में अतीक के जीवन और उसके पतन की गाथा को समझने के लिए दैनिक भास्कर की एक टीम ने ‘चकिया’ गांव का दौरा किया, जहां अतीक का जन्म हुआ था। आज से 63 साल पहले अतीक के पिता ने इसी गांव में अपनी छोटी-सी जिंदगी बसर की। समय के साथ, अतीक ने न केवल अपनी संपत्ति बढ़ाई, बल्कि अपने पैरों पर खड़े होने के लिए घातक अपराधों का भी सहारा लिया, जिसमें हत्या और अपहरण शामिल थे। अतीक के घर की स्थिति अब पूरी तरह से बदल चुकी है, जहां कभी खुशहाली थी, आज प्रशासन ने सब-कुछ तोड़ दिया है। उसका पुश्तैनी घर अब खंडहर में तब्दील हो चुका है, और प्रशासन हर महीने अतीक की संपत्तियाँ कुर्क कर रहा है।

अतीक के साढ़ू का घर भी प्रशासन के हाथों ढ़ह गया है। इमरान, जो अपने समय का एक प्रभावी माफिया था, पर भी कई केस दर्ज हैं। उनके जमींदोज घर से कुछ ही दूरी पर अतीक से जुड़ी हुई जमीनें हैं, जिस पर स्थानीय निवासी कई सालों से खेती किया करते थे। लेकिन अतीक की बाउंड्री की वजह से उनकी जिंदगी में काफी परिवर्तन आया।

लूकरगंज में अतीक का भव्य ऑफिस, जो कभी उसके राजनीतिक करियर का केंद्र रहा, अब प्रशासन द्वारा ध्वस्त कर दिया गया है। इस ऑफिस में पहले महंगे डिजाइन के साथ सभी सुविधाएं मौजूद थीं। आज यहां केवल कचरा और उदासी है। प्रशासन की कार्रवाई के कारण अतीक की संपत्तियों पर सरकार की नज़रें बेनामी संपत्तियों के मामले में भी गहरी हैं। अतीक की पत्नी के नाम भी कई संपत्तियाँ कुर्क की गई हैं, जिससे उनकी ये संपत्तियाँ वित्तीय जांच का केंद्र बन चुकी हैं।

गुंडागर्दी और सत्ता का खेल खेलने वाले अतीक ने राजनीति में भी अपना नाम बनाया। वह 1989 से 1996 के विधानसभा चुनाव में जीतते रहे, लेकिन उन्हें कई बार खुद को मुश्किलों का सामना करना पड़ा। उनका राजनैतिक सफर कई अपहरण और हत्या के आरोपों से भरा रहा। अंततः अतीक की कहानी एक ऐसे अपराधी की बन गई, जिसने न केवल अपने परिवार को खोया बल्कि अपने साम्राज्य के पतन का भी सामना किया। 24 फरवरी 2023 को वकील उमेश पाल की हत्या ने अतीक और उसके बेटे के लिए भी एक नया संकट पैदा किया। इस हत्या के बाद अतीक की गिरफतारी और उसके बेटे के एनकाउंटर ने उसकी पूरी दुनिया को तहस-नहस कर दिया।

अतीक की कहानी हमें यह सिखाती है कि अपराध की दुनिया में कामयाबी का मतलब सिर्फ अस्थायी लाभ होता है, जो न केवल खुद के बल्कि पूरे परिवार को भी तबाह कर सकता है।