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ब्रह्माकुमारीज संस्थान में पहली बार दीदी राज: मोहिनी प्रमुख, मुन्नी को अहम पद!

ब्रह्माकुमारीज संस्थान ने एक महत्वपूर्ण बदलाव किया है, जिसमें राजयोगिनी मोहिनी दीदी (84) को संस्थान की छठी मुख्य प्रशासिका के रूप में नियुक्त किया गया है। उन्हें यह प्रतिष्ठित पद वर्तमान मुख्य प्रशासिका दादी रतनमोहिनी के निधन के पश्चात सौंपा गया है। साथ ही, राजयोगिनी मुन्नी दीदी को अतिरिक्त मुख्य प्रशासिका की जिम्मेदारी दी गई है। यह नियुक्ति विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि आमतौर पर संस्थान की नेतृत्व भूमिका दादियों को दी जाती थी, लेकिन इस बार दीदी को यह पद सौंपा गया है। यह निर्णय रविवार को हुई मैनेजमेंट कमेटी की बैठक में सर्वसम्मति से लिया गया।

मोहिनी दीदी ने पिछले चार वर्षों से अतिरिक्त मुख्य प्रशासिका के रूप में कार्य किया है। उनका जन्म 1941 में दिल्ली में हुआ था, जहाँ से उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से इतिहास, राजनीतिक विज्ञान और पत्रकारिता में स्नातक की डिग्री प्राप्त की। वे 1972 में विदेशों में सेवा केंद्रों की स्थापना करने के लिए अग्रसर हुईं और इसके बाद उत्तरी अमेरिका और अमेरिका में भी क्षेत्रीय मुख्यालय स्थापित किया। इस प्रकार, मोहिनी दीदी ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ब्रह्माकुमारीज संस्थान का नेटवर्क विस्तृत किया है। इसके साथ ही, वे 1981 से संयुक्त राष्ट्र में संस्थान का प्रतिनिधित्व कर रही हैं और वर्तमान में यूएसए के वर्ल्ड स्प्रीचुअल ऑर्गेनाइजेशन की अध्यक्षा भी हैं।

दादी रतनमोहिनी का 7 अप्रैल को अहमदाबाद के एक निजी अस्पताल में निधन हुआ था। वे 101 वर्ष की उम्र में अपने जीवन की अंतिम सांस लीं। दादी रतनमोहिनी का अंतिम संस्कार 10 अप्रैल को आबूरोड के शांतिवन परिसर में किया गया, जहाँ उन्हें अंतिम विदाई देने भारी संख्या में अनुयायी पहुंचे। यह घटना उनके अनुयायियों के लिए एक गहन दुःख का क्षण था और पूरे देशभर से जनसमूह उनके अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए उपस्थित हुए।

मोहिनी दीदी की नियुक्ति के साथ-साथ, संस्था ने एक नई दिशा की ओर कदम बढ़ाया है। इस समय में जब विश्व को शांति, सहानुभूति और सहयोग की आवश्यकता है, मोहिनी दीदी के मार्गदर्शन में ब्रह्माकुमारीज संस्थान निश्चित रूप से इस दिशा में महत्वपूर्ण योगदान देगा। उनकी अनुभव और नेतृत्व क्षमता से संस्थान को नई ऊँचाइयों पर ले जाने की उम्मीद की जा रही है। ब्रह्माकुमारीज संस्थान के अनुयायी उनकी नेतृत्व क्षमता को देखकर उत्साहित हैं और आशा करते हैं कि वे अपने अनुशासन और सेवाओं से समाज में सकारात्मक बदलाव लाने में सक्षम रहेंगी।