सुरक्षा एजेंसियों का चौंकाने वाला खुलासा: बाटला एनकाउंटर से जयपुर ब्लास्ट की गुत्थी सुलझी!
राजस्थान के जयपुर में 13 मई 2008 को हुए सीरियल ब्लास्ट ने पूरे देश को हिला कर रख दिया था, जिसमें 71 से अधिक लोगों की जान गई थी और 150 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। हाल ही में, जयपुर की स्पेशल कोर्ट ने इस मामले में चार आतंकियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इनमें से तीन आतंकवादी आजमगढ़ के निवासी हैं, जबकि एक भदोही का रहने वाला है। यह तथ्य दर्शाता है कि आतंकियों ने अपने पहचान छुपाने के लिए अपने नाम, जाति और धर्म को भी बदल दिया था। इस कारण सुरक्षा एजेंसियों को इन्हें पकड़ने में 17 वर्षों का समय लग गया।
जैसे ही जयपुर में हुए ब्लास्ट के चार महीने बाद, दिल्ली के बाटला हाउस में एक और बड़ा सीरियल ब्लास्ट हुआ। पुलिस ने जब जामियानगर के बाटला हाउस में छापेमारी की, तब मोहम्मद सैफ को गिरफ्तार किया गया। सैफ के खुलासे से पता चला कि जयपुर ब्लास्ट में इंडियन मुजाहिदीन के कई प्रमुख आतंकवादी शामिल थे, जिनमें आरिफ खान, शादाब बेग, मोहम्मद खालिद, सैफुर रहमान, साजिद छोटा, सलमान और मोहम्मद आतिफ अमीन का नाम सामने आया।
जयपुर ब्लास्ट में शामिल आतंकियों ने अपना नाम बदलकर टिकट बुक कर इस वारदात को अंजाम दिया। आजमगढ़ के तीनों आतंकियों ने दिल्ली से जयपुर जाने के लिए हिंदू नामों का उपयोग किया था। उनके द्वारा खरीदी गई साइकिल भी ऐसे ही नामों पर खरीदी गई थी। सैफुर्रहमान ने अपना नाम अजय सिंह रखा, जबकि मोहम्मद सैफ ने हर्ष यादव के नाम से टिकट बुक किया। इसी तरह, मोहम्मद सरवर ने राजहंस नाम अपनाया। इन आतंकियों ने साइकिल में टाइम बम लगाकर आतंक का एक खौफनाक मंजर पेश किया।
हमले के लिए इन्होंने पहले रैकी की थी, जिसमें आजमगढ़ का एक नाबालिग भी शामिल था। धमाकों के बाद, एक साइबर कैफे से मेल भेजकर इंडियन मुजाहिदीन ने हमलों की जिम्मेदारी ली थी। इस मेल से शहबाज की पहचान भी हुई, जो बाद में इस हमले में शामिल अन्य दोषियों में से एक था।
जहां जयपुर ब्लास्ट के दोषियों को सजा सुनाई जा रही है, वहीं अहमदाबाद में हुए एक अन्य सीरियल ब्लास्ट में भी कड़ी सजाएं दी गई थीं। 26 जुलाई 2008 को हुए इस ब्लास्ट में 56 लोगों की जान गई थी और 200 से अधिक लोग घायल हुए थे। इसमें 38 दोषियों को फांसी की सजा और उम्रकैद की सजा मिली, जिसमें से छह आजमगढ़ जिले के निवासी थे। इस प्रकार, देश में आतंकवाद की समस्या के खिलाफ सुरक्षा एजेंसियों की मेहनत और कानून व्यवस्था की प्रक्रिया की महत्ता की तस्वीर उभरती है।

