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लखनऊ में बच्चा चोरी अफवाह से टीम पर हमला, महिला कर्मचारी को दांत से काटा!

लखनऊ के आशियाना इलाके में सोमवार को भिक्षावृत्ति कर रहे बच्चों के रेस्क्यू के दौरान जिला प्रशासन की टीम पर हमला हो गया। स्थानीय लोगों ने बच्चा चोरी के संदेह में उन पर आक्रमण किया। यह घटना बंगला बाजार क्षेत्र में हुई, जहां 24 से अधिक पुरुषों और महिलाओं ने टीम की धुनाई की। हमले की चपेट में आई महिला कर्मचारी कंचन को गंभीर चोटें आईं, जिसमें उनके हाथ पर काटने के निशान और बालों के गुच्छे नोचने के साथ-साथ उन पर शारीरिक प्रहार भी किया गया। घटना का शिकार हुए संरक्षण अधिकारी सूर्यकांत चौरसिया भी थे, जिनका भी समूह ने पीछा किया। किसी तरह टीम ने अपनी जान बचाई और वहाँ से भाग खड़ी हुई।

जिला प्रशासन की यह टीम पिछले तीन दिनों से भिक्षावृत्ति में जुटे बच्चों को रेस्क्यू करने के अभियान में थी। सोमवार दोपहर करीब 3 बजे टीम ने 29 महिलाओं और बच्चों को सुरक्षित स्थान पर भेजने की प्रक्रिया शुरू की। जब टीम ने उन्हें खाना खिलाने के लिए एक स्थान पर रोका, तभी दो हेलमेट पहने युवक वहां पहुँचे और बच्चा चोरी का आरोप लगाकर शोर मचाने लगे। इस आरोप के बाद नट समुदाय के लोग मौके पर आ गए और टीम पर हमला कर दिया। हाथापाई के इस दौरान कंचन को गंभीर चोटें आईं और उनके बचाव में आए चौरसिया पर भी भीड़ ने आक्रमण किया।

घटना के बाद, लखनऊ के डीपीओ विकास सिंह स्थल पर पहुँचे और स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने बताया कि आशियाना थाने में इस मामले में तीन अलग-अलग FIR दर्ज की गई हैं, जिसमें सरकारी कार्य में बाधा डालना, भिक्षावृत्ति के लिए दोषपूर्ण गैंग चलाना और सरकारी कर्मचारियों के साथ मारपीट की धाराएँ लगाई गई हैं। FIR में दो व्यक्ति नामित हैं, जबकि कई अन्य अज्ञात लोगों को भी आरोपी बनाया गया है। रेस्क्यू किए गए बच्चों को काउंसिलिंग के बाद उनके माता-पिता को सौंप दिया गया, साथ ही उनसे एक लिखित आश्वासन भी लिया गया कि भविष्य में वे अपने बच्चों को भिक्षावृत्ति नहीं करने देंगे। डीपीओ ने स्पष्ट किया कि अगर पुनः ये बच्चे पकड़े जाते हैं, तो माता-पिता के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

इस घटना के बाद झोपड़पट्टी में रहने वाली बंजारा समाज की कई महिलाएं और बच्चे थाना पहुँचे, जहां उन्होंने रेस्क्यू टीम पर अभद्रता और छेड़छाड़ का आरोप लगाया। उन्होंने अपनी शिकायतों को लिखित रूप में पुलिस को सौंपी। यह घटना लखनऊ में प्रशासनिक प्रयासों और स्थानीय समुदायों के बीच में जटिलताएँ प्रस्तुत करती है, जहां भिक्षावृत्ति से जुड़ी समस्याएँ और कानून-व्यवस्था के मुद्दे जटिल रूप ले सकते हैं।

हालांकि, लखनऊ में यह एक बड़ी समाजिक समस्या के रूप में उभरा है, लेकिन साथ ही यह स्थानीय समुदायों द्वारा किए जा रहे संघर्ष और उनके अधिकारों के प्रति जागरूकता भी दिखाता है, जो आगे की चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार हैं। प्रशासन को चाहिए कि वह इस मामले में तत्परता दिखाए और बच्चों के अधिकारों की रक्षा के लिए अधिक गंभीरता से कार्य करे।