पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत ने चुनाव आयोग की साख पर उठाए सवाल, कहा, आयोग का रुख बदल गया
गहलोत ने कहा कि गुरुवार को राहुल गांधी के खुलासे के बाद देश चिंतित है। जब चुनाव आयोग सत्ताधारी दल से मिलीभगत कर ले तो देश में लोकतंत्र कैसे बचेगा? लोकसभा चुनाव में 25 सीटों का ही तो फासला था। भाजपा वाले सब जगह नहीं चुनिंदा जगहों पर गड़बड़ करवाते हैं। इतनी ही गड़बड़ी करवाते हैं कि जीत जाएं। धनबल बहुत बड़ा खतरा है, इन्होंने लूट लिया देश को। इलेक्टॉरल बॉन्ड को सुप्रीम कोर्ट ने असंवैधानिक बताया फिर भी कुछ नहीं किया।
गहलोत ने केन्द्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि जब से चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के कानून में बदलाव हुआ है, तभी से चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठने लगे हैं। उन्होंने कहा कि पहले चयन समिति में भारत मुख्य न्यायाधीश होते थे, लेकिन अब उन्हें हटाकर गृहमंत्री अमित शाह को शामिल कर लिया गया है। इसका नतीजा यह हुआ है कि चुनाव आयोग का रवैया ही बदल गया है। गहलोत ने कहा कि जब चुनाव आयोग के रवैये से जनता के मन में संदेह पैदा हो, तो उसकी जिम्मेदारी बनती है कि वह इन आरोपों पर सफाई दे, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। मुख्य चुनाव आयुक्त का यह कहना कि ‘मैं किस पार्टी से मिलूंगा, ये मैं तय करूंगा’, यह अपने आप में चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल खड़ा करता है।
गहलोत ने कहा कि राहुल गांधी ने जो सवाल उठाए हैं, उनका असर पूरे देश पर पड़ने वाला है। राहुल गांधी ने देश को सचेत किया है। राहुल गांधी ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर जो सवाल उठाए हैं, वे बेहद जरूरी हैं और उनका जवाब दिया जाना चाहिए। इसके उलट यह पहली बार हो रहा है कि विपक्ष से ही शपथ पत्र मांगा जा रहा है। चुनाव आयोग कह रहा है कि राहुल गांधी शपथ लेकर ये सारी बातें कहें। वो ये भूल रहे हैं कि राहुल गांधी एक संवैधानिक पद पर हैं और संविधान की शपथ लेकर कार्य कर रहे हैं जिसमें संवैधानिक संस्थाओं की मजबूती के लिए कार्य करना निहित है।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विपक्ष का काम सवाल उठाना है और सत्ता पक्ष का काम उन सवालों का जवाब देना है, लेकिन आज स्थिति उलट है। उन्होंने बताया कि आज उन्होंने देखा कि चार राज्यों राजस्थान, महाराष्ट्र, बिहार और मध्यप्रदेश की चुनाव आयोग की वेबसाइट आज बंद है। उन्होंने आशंका जताई कि कहीं इसमें कोई गड़बड़ी तो नहीं हो रही है। हो सकता है इस प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद खोल दे। कुछ सुधार कर रहे होंगे।
गहलोत ने कहा, दरअसल चुनाव आयोग अब “चोरी और सीनाजोरी” वाली स्थिति में आ गया है। अगर चुनाव आयोग अपनी जगह सही होता तो वो राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी की मांग पर वोटर लिस्ट का डाटा मशीन रीडेबल फॉर्मेट जैसे एक्सेल फॉर्मेंट में उपलब्ध करवा देता। इससे जो काम करीब छह महीने की मेहनत के बाद हो पाया वो महज कुछ मिनटों में हो जाता। पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत ने इलेक्टोरल बॉन्ड को लेकर भी सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने इसे गैर-कानूनी करार दिया है, इससे बड़ा दुर्भाग्य क्या होगा?
गहलोत ने कन्हैयालाल हत्याकांड का जिक्र करते हुए कहा कि यह एक संगीन मामला था और अगर यह केस राजस्थान सरकार के पास होता तो अब तक दोषियों को सजा हो गई होती, लेकिन केस एनआईए ने ले लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस मामले में गृहमंत्री अमित शाह ने भी कोई जवाब नहीं दिया। उन्होंने यह भी कहा कि इस हत्याकांड के दोषियों का संबंध भाजपा से था, जिस पर आज तक कोई चर्चा नहीं होती।
अशोक गहलोत ने देश की विदेश नीति पर भी चिंता जाहिर की और कहा कि मुसीबत आती है तो चारों तरफ से आती है। एक समय इंदिरा गांधी अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति निक्सन के सामने अकेली खडी हो गई थी। आज भारत अंतरराष्ट्रीय मंच पर अलग-थलग पड़ गया है। उन्होंने कहा कि चीन और तुर्की जैसे देश पाकिस्तान के साथ खड़े हैं, और यहां तक कि हमारा मित्र रूस भी चुप है। उन्होंने कहा कि इसी वजह से अमेरिका जैसी ताकतें भी भारत पर व्यापारिक दबाव बना रही हैं। पच्चीस से पचास प्रतिशत टेरिफ हो गया है, ये कमाल की बात है। गहलोत ने कहा कि हमारी प्रार्थना है कि मोदी जी देश का इकबाल बुलंद रखें, और अगर देशहित में कोई कदम उठाया जाता है तो पूरा देश एकजुट होकर उनके साथ खड़ा रहेगा।

