Himachal Pradesh

शिमला में आवारा कुत्तों को लगेंगे स्मार्ट टैग और जीपीएस कॉलर

नगर निगम शिमला के वेटनरी पब्लिक हेल्थ ऑफिसर डॉ. राहुल नेगी ने बताया कि स्मार्ट कॉलर लगाने का अभियान जल्द शुरू किया जाएगा। कॉलर में लगे QR कोड को स्कैन करते ही कुत्ते की उम्र, सेहत, नसबंदी, टीकाकरण और व्यवहार से जुड़ा पूरा रिकॉर्ड सामने आ जाएगा। वहीं, जीपीएस से यह पता लगाया जा सकेगा कि कौन सा कुत्ता किस इलाके में घूम रहा है और उसकी गतिविधियां कैसी हैं। डॉ. नेगी ने कहा कि इस पहल से हर कुत्ते का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होगा और समय पर टीकाकरण व देखभाल सुनिश्चित होगी।

नगर निगम शिमला के महापौर सुरेंद्र चौहान ने बताया कि इस अभियान में कुत्तों की नसबंदी, टीकाकरण और नंबरिंग की जाएगी। आक्रामक या बार-बार काटने वाले कुत्तों को चिन्हित कर टूटीकंडी डॉग हॉट में शिफ्ट किया जाएगा ताकि लोगों को सुरक्षित माहौल मिल सके। उन्होंने कहा कि यह देश में अपनी तरह का पहला प्रयास है, जिसमें वैक्सीनेशन, स्टरलाइजेशन और डिजिटलाइजेशन को एक साथ जोड़ा गया है।

शहर में इस समय 4,000 से ज्यादा आवारा कुत्ते हैं और हर महीने 100 से ज्यादा डॉग बाइट केस आईजीएमसी और डीडीयू अस्पताल में दर्ज होते हैं। इनमें महिलाएं और बच्चे भी बड़ी संख्या में शिकार बनते हैं। निगम को उम्मीद है कि स्मार्ट कॉलर तकनीक से लोगों की सुरक्षा बढ़ेगी और कुत्तों के काटने की घटनाओं पर नियंत्रण होगा।

इसी के साथ शिमला में 15 से 29 अगस्त तक मेगा डॉग वैक्सीनेशन ड्राइव भी चल रही है। इसका शुभारंभ उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने रिज मैदान से किया। अभियान में नगर निगम शिमला, पशुपालन विभाग, ह्यूमेन पीपल एनजीओ और अंतरराष्ट्रीय संगठन मिशन रैबीज़ मिलकर काम कर रहे हैं। इसमें शहर के सभी 34 वार्डों में करीब 4,000 कुत्तों को एंटी-रेबीज़ का टीका लगाया जा रहा है। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि राजधानी और पर्यटन नगरी शिमला में यह कदम लोगों को बड़ी राहत देगा और आवारा कुत्तों की समस्या पर काबू पाने में मददगार साबित होगा।