दूसरे की सिम इस्तेमाल नहीं करने की शर्त पर साइबर आरोपी को जमानत
अदालत ने कहा कि आरोपी किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर कोई सिम कार्ड इस्तेमाल नहीं करेगा। वहीं आरोपी इस आश्य एक अंडरटैकिंग देगा कि अगर वह किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर जारी सिम कार्ड का इस्तेमाल कर रहा है तो ज़मानत आदेश वापस लिया जा सकता है। अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड पर मौजूद तथ्यों के अनुसार आरोपी के पास से मिले सिम कार्डों का इस्तेमाल साइबर अपराध गतिविधियों में किया गया था। इसलिए यह शर्त लगाना उचित हैं।
सरकारी अधिवक्ता मानवेन्द्र सिंह ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि डीग पुलिस अधीक्षक कार्यालय को मिली सिम कार्ड दुरुपयोग की सूचना के आधार पर पुलिस ने दो युवकों को संदिग्ध अवस्था में पकड़ा था। तलाशी लेने पर पता चला कि वे अन्य व्यक्तियों के नाम से जारी सिम कार्ड का उपयोग कर रहे थे। साइबर अपराध पोर्टल पर जांच से पता चला कि इन सिम कार्ड का इस्तेमाल साइबर अपराध गतिविधियों में किया गया था। इनका आरोप गंभीर प्रकृति के हैं। दूसरी ओर याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने बहस करते हुए कहा कि पुलिस ने केवल संदेह के आधार पर 4 अगस्त को युवक को पकड़ा था। उसके खिलाफ ना तो किसी तरह की धोखाधड़ी की कोई शिकायत है और ना ही इस मामले में कोई पीड़ित हैं। उन्होने कहा कि आरोपी लंबे समय से जेल में है। अब उसकी जांच में कोई आवश्यकता नहीं है। युवक का आपराधिक रिकोर्ड भी नहीं है। ऐसे में जमानत दी जाए।

