कवियों की स्वर-लहरियों से गूंज उठा गुरुकुल कांगड़ी का अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी संकाय
देर रात तक प्रस्तुत कविताओं में आध्यात्मिकता, साहस, प्रेम, मानवीय संबंधों और दर्शन जैसे विषयों की गहराई को प्रभावशाली ढंग से उकेरा गया, जिसने उपस्थित सभी जनों के हृदय को स्पर्श किया।
इस आयोजन के मुख्य आयोजक अधीर कौशिक थे, जिनकी प्रेरणा और प्रयासों से यह कार्यक्रम संभव हो पाया। प्रसिद्ध कवि अभिषेक भारद्वाज ने कार्यक्रम का संयोजन करते हुए अपनी काव्य-पंक्तियों से सम्मेलन को आरंभ से ही काव्यात्मक ऊर्जा प्रदान की। कार्यक्रम संयोजक के रूप में असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. प्रशांत कौशिक ने इस कार्यक्रम के सफल संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई तथा अपनी प्रेम और व्यंग्य-प्रधान कविताओं से श्रोताओं को खूब आनंदित किया। कार्यक्रम के सफल आयोजन में डॉ. लोकेश जोशी और डॉ. विवुद फोर सहित संकाय के अनेक सदस्यों का सहयोग सराहनीय रहा।
प्रसिद्ध कवि दिव्यांश दुष्यंत ने अपनी वीर रस से ओतप्रोत रचनाओं द्वारा श्रोताओं में जोश और उत्साह का संचार किया। कवयित्रियों महिमा और मोनिका मतांशा ने मानवीय संवेदनाओं की जटिलताओं को अपनी कविताओं के माध्यम से गहराई से अभिव्यक्त किया। वहीं कवि श्रीकांत श्री ने अपने प्रखर वीर रस के साथ-साथ अपनी चुटीली बातचीत और विनोदपूर्ण शैली से भी श्रोताओं को खूब आनंदित किया। अपराजिता ने अपनी सुरीली कविताओं से पूरे सभागार को भाव-विभोर कर दिया।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के अनेक वरिष्ठ अध्यापक एवं गणमान्य अतिथि डॉ. प्रवीण पांडेय, लोकेश भारद्वाज, प्रदीप पांडेय, मुकेश आर्य और डॉ. अमन त्यागी मौजूद थे।

