डॉक्टरों की सेवा उपभोक्ता संरक्षण कानून से बाहर रखने की मांग, सुप्रीम कोर्ट में याचिका
नई दिल्ली, 10 फ़रवरी । उच्चतम न्यायालय में एक याचिका दायर कर मांग की गई है कि डॉक्टरों की सेवा को उपभोक्ता संरक्षण कानून के दायरे से बाहर किया जाए। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया।
याचिका एसोसिएशन ऑफ हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स और अन्य ने दायर की है। याचिका में कहा गया है कि चिकित्सकीय लापरवाही से निपटने के लिए दूसरे बेहतर तरीके भी हैं जिनके जरिये कार्रवाई की जा सकती है। याचिका में कहा गया है कि उपभोक्ता संरक्षण कानून के तहत डॉक्टरों की सेवा को लाने से डॉक्टर और मरीज के बीच विश्वास को कमजोर करता है। उपभोक्ता संरक्षण कानून के तहत कोई व्यक्ति अपनी तकलीफों के तुरंत समाधान के लिए अगर कुछ खरीदता है तो वो खराब या अनैतिक सेवा के लिए उपभोक्ता फोरम का दरवाजा खटखटा सकता है।
याचिका में कहा गया है कि चिकित्सा सेवा को साधारण उपभोक्ता सेवा की तरह मानना इस पेशे की प्रकृति से मेल नहीं खाता है। याचिका में कहा गया है कि 2024 में उच्चतम न्यायालय ने वकीलों की सेवा को उपभोक्ता संरक्षण कानून से बाहर रखा और कहा कि प्रोफेशनल सेवाएं व्यावसायिक सेवाओं से अलग हैं। याचिका में कहा गया है कि इसी फैसले में उच्चतम न्यायालय ने कहा था कि उचित मामले में चिकित्सा सेवा को भी उपभोक्ता संरक्षण कानून के दायरे से बाहर रखने पर विचार किया जाना चाहिए।

