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नेपाल के प्रधानमंत्री शाह और उनके मंत्रियों की संपत्ति भी जांच के दायरे में

काठमांडू, 16 अप्रैल । नेपाल के सभी पूर्व प्रधानमंत्रियों, मंत्रियों और उच्च पदस्थ सरकारी अधिकारियों की संपत्ति की छानबीन के लिए गठित जांच आयोग वर्तमान प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह और उनके मंत्रिमंडल में शामिल मंत्रियों की संपत्ति की भी जांच करेगी।

प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह के निजी सचिवालय की तरफ से यह स्पष्ट किया गया है कि 2005 से अब तक के सभी प्रधानमंत्री, मंत्री, उच्च पदस्थ सरकारी अधिकारी, संवैधानिक और राजनीतिक नियुक्ति पाने वाले सभी पदाधिकारियों की संपत्ति की छानबीन के लिए गठित आयोग के जांच के दायरे में वर्तमान प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह और उनके मंत्रियों की संपत्ति भी आएगी।

नेपाल सरकार ने अपनी चुनावी प्रतिबद्धता के अनुसार उच्च सार्वजनिक पदों पर बैठे व्यक्तियों की संपत्ति की जांच के लिए बुधवार को एक आयोग का गठन किया है। मंत्रिपरिषद् की बैठक ने पूर्व न्यायाधीश राजेन्द्र भण्डारी की अध्यक्षता में आयोग बनाने का निर्णय लिया, जिसके बाद राजनीतिक और प्रशासनिक क्षेत्रों में हलचल मच गई है।

प्रधानमंत्री के मीडिया सलाहकार दीपा दहाल के अनुसार, प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह और वर्तमान मंत्रिपरिषद् के सदस्यों की संपत्ति की भी जांच की जाएगी। आयोग को यह अधिकार दिया जाएगा कि वह सरकार के प्रधानमंत्री और मंत्रियों की संपत्ति की भी जांच कर सके।

संपत्ति जांच के दायरे में सत्तारूढ़ दल राष्ट्रीय स्वतन्त्र पार्टी के अध्यक्ष रवि लामिछाने भी आएंगे। वे दो बार अल्पकाल के लिए उपप्रधानमंत्री और गृहमंत्री रह चुके हैं। रवि लामिछाने के खिलाफ देशभर के करीब आधा दर्जन जिला अदालत में सहकारी बैंक घोटाला का मुकदमा चल रहा है।

2005 के बाद प्रधानमंत्री बने -शेरबहादुर देउवा, केपी शर्मा ओली और पुष्पकमल दाहाल प्रचण्ड और उनके परिवार वालों की संपत्ति की भी जांच होगी। इनमें ओली और प्रचण्ड तीन-तीन बार तथा देउवा दो बार प्रधानमंत्री रह चुके हैं। इसी तरह माधव कुमार नेपाल, झलनाथ खनाल, खिलराज रेग्मी और बाबुराम भट्टराई भी प्रधानमंत्री बने हैं इसलिए वे भी जांच के दायरे में आएंगे।

दिवंगत नेताओं के मामले में क्या किया जाएगा, यह एक अलग प्रश्न है। 2005 के बाद प्रधानमंत्री रहे गिरिजा प्रसाद कोइराला और सुशील कोइराला का निधन हो चुका है। कुछ पूर्व मंत्री भी दिवंगत हैं। सामान्यतः ऐसे मामलों में उनके परिवार की संपत्ति की जांच का प्रावधान किया जाता है।

जेन-जी आंदोलन के बाद अंतरिम सरकार संभालने वाली प्रधानमंत्री सुशीला कार्की और उनके मंत्रिमंडल के सदस्यों की संपत्ति की भी जांच होगी।

राष्ट्र प्रमुखों के संबंध में स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है। 2005 के आंदोलन के बाद नेपाल में राजतंत्र समाप्त होकर गणतंत्र स्थापित हुआ था। उस समय तक ज्ञानेन्द्र शाह नेपाल के राजा थे।

इसके बाद रामवरण यादव, विद्यादेवी भण्डारी और रामचन्द्र पौडेल राष्ट्रपति बने। यदि आयोग को अधिकार मिला तो पूर्व राजा से लेकर वर्तमान राष्ट्रपति तक की जांच की संभावना है, हालांकि यह पद औपचारिक होने के कारण उन्हें शामिल किया जाए या नहीं- इस पर भी विचार हो रहा है।

उच्च पदस्थ सरकारी कर्मचारियों की संपत्ति की भी जांच की जाएगी। ‘उच्च पद’ की परिभाषा कार्यादेश में तय की जाएगी, लेकिन सचिव स्तर के अधिकारी इसमें निश्चित रूप से शामिल होंगे। इससे नीचे के स्तर के कर्मचारियों पर निर्णय अभी बाकी है।

हालांकि निचले स्तर के कर्मचारियों द्वारा भी भ्रष्टाचार के जरिए बड़ी संपत्ति अर्जित करने के मामले सामने आते रहे हैं, लेकिन बड़ी संख्या के कारण सभी की जांच आसान नहीं होगा। राजदूतों को भी संभवतः जांच के दायरे में लाया जा सकता है।

आयोग की समय सीमा अभी तय नहीं की गई है। संपत्ति जांच एक जटिल प्रक्रिया है और बड़ी संख्या में लोगों को शामिल किए जाने के कारण इसमें लंबा समय लग सकता है। साथ ही, वर्तमान सरकार द्वारा गठित आयोग अपने ही उच्च पदाधिकारियों की कितनी स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच करेगा—यह भी एक महत्वपूर्ण प्रश्न है।