हाई कोर्ट ने प्रो अशोक स्वैन की याचिका पर जवाब देने के लिए केंद्र को दो हफ्तों का समय दिया
नई दिल्ली, 06 मई । दिल्ली उच्च न्यायालय ने स्वीडन में भारतीय मूल के प्रोफेसर अशोक स्वैन की ओवरसीज सिटिजन ऑफ इंडिया (ओसीआई) कार्ड बहाल करने के कोर्ट के आदेश के बावजूद भारत में प्रवेश करने की अनुमति नहीं देने के खिलाफ दायर याचिक पर केंद्र सरकार को जवाब देने के लिए दो हफ्ते का समय दे दिया है। जस्टिस पुरुषेंद्र कौरव की बेंच ने मामले की अगली सुनवाई 23 जुलाई को करने का आदेश दिया।
बुधवार को सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश वकील ने जवाब दाखिल करने के लिए समय देने की मांग की, जिसके बाद कोर्ट ने दो हफ्ते का समय दे दिया। कोर्ट ने 14 नवंबर, 2025 को केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया था।
उच्च न्यायालय ने 28 मार्च, 2025 को प्रोफेसर स्वैन की ओसीआई कार्ड रद्द करने के केंद्र सरकार के आदेश को निरस्त कर दिया था। स्वैन स्वीडन के उप्पसाला यूनिवर्सिटी में पीस एंड कंफ्लीक्ट रिसर्च के प्रोफेसर हैं। 30 जुलाई, 2023 को केंद्र सरकार ने अपने आदेश में स्वैन का ओसीआई कार्ड निरस्त कर दिया था। इसके पहले 10 जुलाई, 2023 को उच्च न्यायालय स्वैन के ओसीआई कार्ड को निरस्त करने के आदेश को रद्द कर दिया था। स्वैन ने अपनी याचिका में कहा था कि वर्तमान सरकार और उसकी नीतियों का विरोध करने की वजह से उन्हें निशाना नहीं बनाया जा सकता है।
स्वैन ने कहा कि इसके पहले भी फरवरी, 2022 में केंद्र सरकार की आलोचना करने की वजह से उनका ओसीआई कार्ड निरस्त कर दिया गया था। उन्होंने न तो कोई भड़काऊ भाषण दिया था और न ही भारत विरोधी गतिविधि में शामिल रहे हैं। एक प्रोफेसर होने के नाते वे सरकार की नीतियों पर चर्चा करते हैं। सरकार की नीतियों की आलोचना करना नागरिकता कानून के तहत भारत विरोधी गतिविधि के तहत नहीं आता है। सुनवाई के दौरान उच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार से पूछा था कि ये कैसा आदेश है। आदेश पारित करते समय दिमाग का उपयोग नहीं किया गया।

