आईटीएटी रिश्वत प्रकरण में न्यायिक सदस्य को जमानत से इनकार
जयपुर, 13 मई । राजस्थान हाईकोर्ट ने आयकर अपीलीय अधिकरण में रिश्वत से जुडे मामले में न्यायिक सदस्य रही एस. सीतालक्ष्मी को राहत देने से इनकार कर दिया है। अदालत ने कहा कि आरोपी के खिलाफ लगे भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी के आरोप प्रथम दृष्टया गंभीर प्रकृति के हैं और इस स्तर पर उसे जमानत देना उचित नहीं है। जस्टिस चन्द्रप्रकाश श्रीमाली की एकलपीठ ने यह आदेश एस. सीतालक्ष्मी की ओर से दायर द्वितीय जमानत याचिका को खारिज करते हुए दिए।
अदालत ने कहा कि आरोपी ने अधिकरण में न्यायिक सदस्य पद पर रहते हुए मैसर्स गोकुल कृपा कॉलोनाइजर्स तथा डेवलपर्स प्रा. लि. के पक्ष में निर्णय पारित कर लगभग 90 करोड़ रुपये की पेनल्टी माफ कर दी। वहीं रिश्वत के तौर पर 50 लाख रुपए में से 30 लाख रुपए खुद ने लिए, जो उसके निवास पर सरकारी वाहन से बरामद हुए। अनुसंधान में यह भी सामने आया कि उसके घर की तलाशी में एक नेकलेस व एक आईफोन भी बरामद हुआ और इन्हें भी उसने रिश्वत के तौर पर लिया था।
जमानत याचिका में कहा गया कि मामले में गत 22 जनवरी को आरोप पत्र पेश होने के बाद अभियोजन स्वीकृति जारी नहीं हुई, जबकि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 19 के तहत मंजूरी मिलनी चाहिए। उस पर आरोप है कि उसने गोकुल कृपा कॉलोनाइजर्स से रिश्वत राशि ली। वहीं इस फर्म के निदेशक सुमेर सिंह सैनी को पूर्व में जमानत हो चुकी है। आरोपी महिला हैं और उसके वृद्ध ससुर गंभीर बीमार हैं। आरोपी का जयपुर से तबादला हो चुका है, इसलिए गवाहों को प्रभावित करने की आशंका नहीं है, इसलिए जमानत दी जाए। जिसका विरोध करते हुए सीबीआई की ओर से अधिवक्ता प्रदीप कुमार ने कहा कि केवल महिला होने के आधार पर जमानत नहीं दी जा सकती। दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद अदालत ने आरोपी को जमानत देने से इनकार कर दिया है।

