Rajasthan

जयपुर में रोड लाइट्स को मिलेगी पहचान, जेडीए-निगम विवाद खत्म होगा

जयपुर, 06 मई । शहर में मुख्य सड़कों से लेकर गली-मोहल्लों तक लगी रोड लाइट्स को अब अलग पहचान दी जाएगी, जिससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि संबंधित लाइट जयपुर विकास प्राधिकरण की है या जयपुर नगर निगम की। इस पहल से आमजन को खराब रोड लाइट्स की शिकायत के लिए दोनों विभागों के बीच भटकना नहीं पड़ेगा।

जयपुर में जेडीए और नगर निगम द्वारा तीन लाख से अधिक रोड लाइट्स का संचालन और संधारण किया जा रहा है। पहचान प्रणाली लागू होने से शिकायतों के निस्तारण में तेजी आएगी और जिम्मेदार विभाग द्वारा समय पर लाइट्स ठीक करवाई जा सकेंगी।

दरअसल, हाल ही में हाईमास्ट लाइट को लेकर जेडीए और निगम के बीच विवाद सामने आया था, जिसके कारण एक शिकायत कई महीनों तक लंबित रही। बाद में मामला मुख्यमंत्री कार्यालय पहुंचने पर समाधान हुआ और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई भी की गई। इसी के बाद रोड लाइट्स की पहचान तय करने की कवायद शुरू की गई।

नई व्यवस्था के तहत जेडीए की रोड लाइट्स पर नीले रंग से और निगम की लाइट्स पर पीले रंग से मार्किंग की जाएगी। जेडीए ने अपने अधीन करीब 8000 रोड लाइट्स में से लगभग 5000 पर मार्किंग कर दी है और कार्य जारी है। प्रथम चरण में सड़कों के शुरुआती और अंतिम पोल को चिन्हित किया जा रहा है, इसके बाद सभी लाइट्स को चिन्हित किया जाएगा। वहीं नगर निगम के अधीन करीब तीन लाख रोड लाइट्स हैं, लेकिन यहां पहचान देने का कार्य अपेक्षाकृत धीमी गति से चल रहा है। अब तक निगम द्वारा करीब 1000 से अधिक लाइट्स पर ही मार्किंग की गई है, जबकि इस संबंध में 28 मार्च को निर्देश जारी किए गए थे।

निगम के एक्सईएन प्रदीप शर्मा ने बताया कि प्रथम चरण में प्रमुख मार्गों के प्रारंभ और अंतिम पोल को चिन्हित किया जा रहा है। दूसरे चरण में सभी रोड लाइट्स पर रंग के माध्यम से पहचान अंकित की जाएगी। इससे आमजन को शिकायत दर्ज कराने में सुविधा होगी और समस्याओं का त्वरित समाधान संभव हो सकेगा। इसके अलावा जेडीए और नगर निगम को अपने-अपने वार्ड, कॉलोनियों, सड़कों और सीवरेज नेटवर्क का सीमांकन भी वेबसाइट के नक्शे में स्पष्ट रूप से दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि भविष्य में किसी प्रकार का विवाद न हो और नागरिकों को असुविधा से बचाया जा सके।