Delhi

हाई कोर्ट ने दिल्ली दंगा मामले में ट्रायल कोर्ट को आरोप तय करने की इजाजत दी

नई दिल्ली, 05 जून । दिल्ली उच्च न्यायालय ने दिल्ली दंगों की साजिश रचने के मामले में ट्रायल कोर्ट को आरोप तय करने की इजाजत दे दी है। जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने इस मामले की आरोपित और पिंजरा तोड़ संगठन की सदस्य देवांगन कलीता की जाफराबाद में फरवरी, 2020 को नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के खिलाफ हुए प्रदर्शन के वीडियो फुटेज की कॉपी मांग करने वाली याचिका खारिज करते हुए ये आदेश दिया।

उच्च न्यायालय ने 12 सितंबर, 2024 को ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया था कि वो आरोप तय करने के मामले में कोई अंतिम आदेश पारित नहीं करें। याचिका में देवांगन कलीता ने 23 फरवरी, 2020 को जाफराबाद में हुए प्रदर्शन की फुटेज की कॉपी देने की मांग की थी। याचिका में कहा गया था कि पुलिस ने इस मामले में अंतिम रिपोर्ट दाखिल कर दी है, लेकिन इसके बावजूद उसे इलेक्ट्रॉनिक तथ्य उपलब्ध नहीं कराए गए हैं। कलीता पर आरोप है कि उसने 22 फरवरी, 2020 को जाफराबाद मेट्रो स्टेशन के पास सड़क जाम करने के लिए लोगों को उकसाया था। कलीता को यूएपीए के मामले में जमानत मिल चुकी है।

उच्चतम न्यायालय ने 5 जनवरी को गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, शिफा उर रहमान, शादाब अहम और मोहम्मद सलीम खान को जमानत दी थी। उसके बाद उच्चतम न्यायालय ने 22 मई को खालिद सैफी और तसलीम अहमद को छह महीने की अंतरिम जमानत दी थी। इस मामले के चार आरोपितों सफूरा जरगर, आसिफ इकबाल तान्हा, देवांगन कलीता और नताशा नरवाल को पहले ही जमानत मिल चुकी है। उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों में 53 लोग मारे गए थे और करीब 200 लोग घायल हुए थे।