Rajasthan

31 साल पहले हटाए गए सैन्य कर्मी को पेंशन देने के आदेश

जयपुर, 09 जून । राजस्थान हाईकोर्ट ने करीब 31 साल पहले सेवा से हटाए गए सैन्यकर्मी को दिव्यांग पेंशन देने के आदेश दिए हैं। अदालत ने माना कि कि याचिकाकर्ता सेना में भर्ती होते समय स्वस्थ था और सेवा के दौरान वह बीमार हुआ। इसलिए माना जाएगा की बीमारी सैन्य सेवा के दौरान उत्पन्न हुई। ऐसे में मेडिकल बोर्ड नहीं बनाना प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है। अब मेडिकल बोर्ड बनाना संभव नहीं है, ऐसे में याचिकाकर्ता को याचिका दायर करने की तारीख से तीन साल पहले से बकाया पेंशन दी जाए। जस्टिस सुदेश बंसल और जस्टिस रवि चिरानिया की खंडपीठ ने यह आदेश ओमप्रकाश की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए।

याचिका में अधिवक्ता असलम खान ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता जून, 1984 में सेना में सिपाही के तौर पर नियुक्त हुआ था। करीब 11 साल की सेवा के बाद जून, 1995 को उसे अनडिजायरेबल सोल्जर मानते हुए सेवा से हटा दिया था। जिसे याचिकाकर्ता ने सशस्त्र बल न्यायाधिकरण में चुनौती दी थी। न्यायाधिकरण की ओर से अगस्त, 2022 में याचिका को देरी के आधार पर खारिज करने पर हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई। याचिका में कहा गया कि सेवा के दौरान वह गंभीर बीमार हो गया था। ऐसे में उसकी वास्तविक स्थिति को छिपाया गया और उसे सेना से हटाते हुए पेंशन से वंचित कर दिया गया। जबकि सेना ने इसके लिए मेडिकल बोर्ड भी नहीं बनाया। इसके अलावा दस साल की सेवा पूरी होने पर वह दिव्यांग पेंशन का अधिकारी है। इसका विरोध करते हुए सेना की ओर से कहा गया कि उसके रिकॉर्ड में पांच नकारात्मक एंट्री होने के चलते उसे पेंशन से वंचित किया गया है और याचिका भी देरी से पेश हुई है। दोनों पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने याचिकाकर्ता को पेंशन के पात्र मानते हुए उसे पेंशन जारी करने को कहा है।