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आईबीएम के साथ समझौता छात्रों को वैश्विक तकनीकों से जोड़ेगा : प्रो. विनय कुमार पाठक

कानपुर, 14 जून । यह समझौता केवल दो संस्थाओं के बीच सहयोग नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के तकनीकी भविष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। आईबीएम जैसी वैश्विक कंपनी के साथ यह साझेदारी हमारे छात्रों को उद्योग की वास्तविक आवश्यकताओं एवं उभरती प्रौद्योगिकियों से जोड़ने का कार्य करेगी। यह बातें रविवार को छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) के कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने कहीं।

तकनीकी नवाचार, अकादमिक उत्कृष्टता और उद्योगोन्मुख कौशल विकास को नई दिशा देने के उद्देश्य से रविवार को छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय और आईबीएम इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के मध्य एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। इस साझेदारी का उद्देश्य विश्वविद्यालय और उससे संबद्ध महाविद्यालयों के विद्यार्थियों को वैश्विक स्तर की उभरती प्रौद्योगिकियों से जोड़ना तथा उन्हें भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप दक्ष बनाना है।

विश्व की अग्रणी प्रौद्योगिकी कंपनियों में शामिल आईबीएम सूचना प्रौद्योगिकी, क्वांटम कंप्यूटिंग और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा रही है। समझौते के तहत आईबीएम अपने अत्याधुनिक एआई टूल्स, क्लाउड प्लेटफॉर्म, तकनीकी संसाधन और विशेषज्ञता छात्रों के लिए उपलब्ध कराएगा। साथ ही कंपनी के विशेषज्ञ विद्यार्थियों को ऑनलाइन और ऑफलाइन माध्यम से प्रशिक्षण, मेंटरशिप तथा उद्योग आधारित परियोजनाओं पर कार्य करने का अवसर देंगे।

इस साझेदारी के अंतर्गत सीएसजेएमयू और आईबीएम संयुक्त रूप से एक वृहद हाइब्रिड हैकाथॉन का आयोजन करेंगे, जिसमें आईबीएम की उन्नत जनरेटिव एआई कोडिंग तकनीक का उपयोग किया जाएगा। यह आयोजन उत्तर प्रदेश सरकार के प्रस्तावित प्रमुख एआई कार्यक्रम “एआई मंथन 2026” के प्री-इवेंट के रूप में आयोजित होगा।

आईबीएम सॉफ्टवेयर लैब्स के वाइस प्रेसिडेंट विशाल चहल ने कहा कि जनरेटिव एआई तकनीक नवाचार को लोकतांत्रिक बना रही है। अब केवल तकनीकी पृष्ठभूमि वाले छात्र ही नहीं, बल्कि कला, वाणिज्य और अन्य विषयों के विद्यार्थी भी अपने विचारों को प्रभावी डिजिटल समाधानों में बदल सकते हैं। उन्होंने कहा कि सीएसजेएमयू के साथ यह सहयोग हजारों छात्रों को भविष्य की तकनीकों से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

कुलसचिव राकेश कुमार मिश्रा ने आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस पहल से विद्यार्थियों को अनुसंधान, सॉफ्टवेयर विकास, समाधान डिजाइन और नवाचार के क्षेत्र में नए अवसर प्राप्त होंगे। आईबीएम का तकनीकी सहयोग और विशेषज्ञ मार्गदर्शन उन्हें वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करेगा।

समझौते के तहत विभिन्न विषयों के छात्र बिना गहन प्रोग्रामिंग ज्ञान के भी एआई आधारित समाधान विकसित कर सकेंगे। विद्यार्थियों को वास्तविक औद्योगिक समस्याओं पर कार्य करने का अवसर मिलेगा। चयनित टीमों को आईबीएम के विशेषज्ञों द्वारा विशेष मेंटरशिप और परियोजना मार्गदर्शन प्रदान किया जाएगा तथा श्रेष्ठ टीमों को राज्य स्तरीय मंच पर अपने नवाचार प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा।

कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी, विभिन्न संकायों के डीन, विभागाध्यक्ष, फैकल्टी सदस्य और आईबीएम के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।