यात्री प्लाजा ई-टेंडर मामले में मोगा ढाबा की याचिका खारिज
प्रयागराज, 17 जुलाई । इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को मुरादाबाद-दिल्ली मार्ग पर गजरौला के पास नए यात्री प्लाजा (एसी बसों हेतु) के लिए जारी ई-टेंडर को रद्द करने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी है। न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति विवेक सरन की खंडपीठ ने यह फैसला सुनाया।
याचिकाकर्ता “मैसर्स मोगा ढाबा विद फैमिली हॉल” 19 अक्टूबर 2024 से उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम के साथ अनुबंध के तहत उसी मार्ग पर पहले से यात्री प्लाजा संचालित कर रहा है। निगम ने 16 जुलाई 2025 को उसी मार्ग पर एक और यात्री प्लाजा के लिए टेंडर जारी किया, जिसे याचिकाकर्ता ने अपने व्यावसायिक हितों के विरुद्ध बताते हुए चुनौती दी थी।
याचिकाकर्ता ने कहा कि निगम की 26 नवंबर.2020 की नीति के अनुसार किसी मार्ग पर 300 से अधिक बसें चलने पर ही अतिरिक्त यात्री प्लाजा खोला जा सकता है, जबकि इस मार्ग पर मात्र 60 बसें चलती हैं।
कोर्ट ने कहा -अनुबंध शुद्ध रूप से व्यावसायिक प्रकृति का है, सांविधिक अनुबंध नहीं, इसलिए याचिकाकर्ता को नया प्लाजा रोकने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है। 26 नवंबर 2020 की गाइडलाइंस किसी कानून के तहत जारी नहीं हुई थीं, इसलिए वे बाध्यकारी नहीं हैं। गाइडलाइंस में एसी बसों के लिए अलग प्लाजा हेतु 300 बसों की शर्त नहीं थी। बसों की संख्या को लेकर तथ्यात्मक विवाद है, जिसका निर्णय रिट क्षेत्राधिकार में नहीं हो सकता। नया प्लाजा खुलने से प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी, जो यात्रियों के हित में है, जनहित के विरुद्ध नहीं।
न्यायालय ने सर्वोच्च न्यायालय के विनय कुमार बनाम उत्तर प्रदेश राज्य तथा जगदीश मंडल बनाम उड़ीसा राज्य मामलों का हवाला देते हुए कहा कि टेंडर संबंधी वाणिज्यिक निर्णयों में न्यायिक समीक्षा सीमित होती है, जब तक कि दुर्भावना या मनमानी साबित न हो।

