अरावली संरक्षण के साथ आदिवासी अधिकारों की रक्षा ज़रूरी : भाजपा नेता बंशीलाल कटारा
डूंगरपुर, 10 अगस्त । अरावली पर्वत श्रृंखला के संरक्षण और दक्षिण राजस्थान के जनजातीय अधिकारों को लेकर सोमवार को उदयपुर के जिला परिषद सभागार में सुप्रीम कोर्ट की हाई पावर कमेटी के समक्ष डूंगरपुर जिले का प्रतिनिधित्व करते हुए भाजपा नेता बंशीलाल कटारा ने ज्ञापन प्रस्तुत किया। उन्होंने अरावली के पारिस्थितिकी संरक्षण और स्थानीय आदिवासियों के अधिकारों के बीच संतुलित नीति बनाने की मांग की।
कटारा ने कहा कि अरावली केवल पत्थरों का पहाड़ नहीं, बल्कि दक्षिण राजस्थान के जल, जंगल, जमीन, जैव-विविधता और समूचे आदिवासी जीवन की जीवनरेखा है। उन्होंने विकास और पर्यावरण को एक-दूसरे के आमने-सामने खड़ा करने के बजाय वैज्ञानिक और सतत दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता बताई। कटारा ने अरावली की पहचान केवल ऊंचाई के आधार पर तय करने के बजाय भू-विज्ञान, जलग्रहण क्षेत्र, जैव-विविधता और पारिस्थितिकी के वैज्ञानिक मानदंड अपनाने का सुझाव दिया। उन्होंने पांचवीं अनुसूची के क्षेत्रों में ग्रामसभाओं और स्थानीय आदिवासी समुदाय की प्रत्यक्ष भागीदारी सुनिश्चित करने, अरावली क्षेत्र की वैज्ञानिक जियो-मैपिंग और कैरिंग कैपेसिटी असेसमेंट कराने तथा पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्रों में खनन पर सख्त नियंत्रण की मांग की।
उन्होंने खनन समाप्त होने के बाद भूमि का पुनर्स्थापन अनिवार्य करने तथा जिला खनिज फाउंडेशन, सीएएमपीए और सीएसआर कोष का उपयोग प्रभावित क्षेत्रों में जल संरक्षण, पर्यावरण सुधार और स्थानीय आजीविका बढ़ाने के लिए करने का सुझाव दिया। कटारा ने कहा कि आदिवासी समाज अरावली के संरक्षण के खिलाफ नहीं है, बल्कि ऐतिहासिक रूप से इसका सबसे बड़ा संरक्षक और भागीदार रहा है। उन्होंने कहा कि अरावली भी बचे, आदिवासियों के संवैधानिक अधिकार भी सुरक्षित रहें और विकास का पहिया वैज्ञानिक व सतत तरीके से आगे बढ़े। उन्होंने समिति से दक्षिण राजस्थान और वागड़ अंचल की अरावली श्रृंखला तथा वहां निवास करने वाले जनजातीय समुदायों पर पड़ने वाले प्रभावों का विशेष सामाजिक-पर्यावरणीय अध्ययन कराने का आग्रह किया।
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