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अशोकनगर: जिले की सभी 110 गौशालाएं बनेंगी जैविक क्रांति का केंद्र

अशोकनगर,27 अगस्त। मध्य प्रदेश के अशोकनगर जिले में मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव द्वारा घोषित कृषि वर्ष के अंतर्गत जिले ने जैविक खेती की ओर एक बड़ा कदम बढ़ाया है। जिले की मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने और किसानों को रासायनिक खादों के चक्रव्यूह से बाहर निकालने के लिए कलेक्टर श्री साकेत मालवीय ने एक दूरगामी पहल की है।

जिले की सभी 110 शासकीय एवं निजी गौशालाओं में बायोगैस विशिष्ट फर्टीलाइजर प्लांट स्थापित करने के सख्त निर्देश सभी जनपद पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों को गुरुवार को जारी किए गए हैं।

कलेक्टर ने जिले की सभी 110 गौशालाओं को अगले एक माह के भीतर इन संयंत्रों से लैस करने का लक्ष्य तय किया है, ताकि इन गौशालाओं को पूर्णत: प्राकृतिक खेती गौशाला के रूप में विकसित किया जा सके।

कैसे काम करेगा यह बायोगैस फर्टीलाइजर प्लांट?यह संयंत्र मूलत: जैविक तरल खाद और जीवामृत तैयार करने की एक बंद टैंक (सील्ड सिस्टम) आधारित आधुनिक व्यवस्था है प्राकृतिक अवयवों का सम्मिश्रण के तहत इसमें गोबर, गौमूत्र और पानी के साथ गुड़, बेसन (दाल का आटा) तथा अन्य जैविक सामग्रियां मिलाई जाती हैं। टैंक में सूक्ष्मजीवों की मदद से इस मिश्रण का किण्वन कराया जाता है, जिससे उच्च गुणवत्ता वाला जीवामृत तैयार होता है। प्लांट में पाइप और वाल्व की विशेष व्यवस्था है, जिससे सामग्री डालना और तैयार तरल निकालना बेहद सुलभ होता है। तैयार जीवामृत को सिंचाई के पानी के साथ या सीधे खेत की मिट्टी में दिया जा सकता है, जो मिट्टी में मित्र सूक्ष्मजीवों की संख्या को तेजी से बढ़ाता है।

देश और किसान दोनों के लिए संजीवनी:गौशालाओं में इन प्लांट्स के लगने से जिले में एक नया जैविक चक्र शुरू होगा लागत में बेहद न्यूनतम इस प्लांट को लगाने और चलाने का खर्च बहुत कम है, जिससे यह मॉडल बेहद व्यावहारिक है। इसके निरंतर प्रयोग से न केवल फसलों का जैविक उत्पादन बढ़ेगा, बल्कि रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता खत्म होगी।

रासायनिक खादों की खपत घटने से भारत सरकार को सब्सिडी और आयात पर खर्च होने वाली बहुमूल्य विदेशी मुद्रा की सीधी बचत होगी। जिले की यह पहल न केवल पर्यावरण और मिट्टी के स्वास्थ्य की रक्षा करेगी, बल्कि आत्मनिर्भर कृषि की दिशा में एक मिसाल साबित होगी।