Uttarakhand

राज्यपाल से त्रिवेंद्र सिंह रावत और प्रो. गोविंद सिंह ने की भेंट, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और स्थानीय संसाधनों के उपयोग पर चर्चा

देहरादून, 18 अगस्त । राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से.नि.) से मंगलवार को लोक भवन में पूर्व मुख्यमंत्री एवं हरिद्वार सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत और मीडिया सलाहकार समिति उत्तराखण्ड के अध्यक्ष प्रो. गोविंद सिंह ने अलग-अलग शिष्टाचार भेंट की।

पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने राज्यपाल के साथ उत्तराखण्ड के ग्रामीण क्षेत्रों में उपलब्ध प्राकृतिक एवं जैविक संसाधनों को आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने की संभावनाओं पर विस्तार से विचार-विमर्श किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में उपलब्ध पिरूल, गोबर और अन्य जैविक अपशिष्टों को केवल कचरा या अपशिष्ट मानने के बजाय इन्हें स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए उपयोगी संसाधन के रूप में विकसित करने की आवश्यकता है।

सासंद रावत ने कहा कि उत्तराखण्ड के जंगलों में बड़ी मात्रा में उपलब्ध पिरूल का वैज्ञानिक एवं तकनीकी तरीके से उपयोग किया जा सकता है। इससे ऊर्जा उत्पादन समेत कई क्षेत्रों में उपयोगी उत्पाद तैयार किए जा सकते हैं। पिरूल के व्यवस्थित उपयोग से जहां वनाग्नि के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है, वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आय के नए अवसर भी पैदा किए जा सकते हैं।

उन्होंने गोबर के बहुआयामी उपयोग की संभावनाओं पर भी राज्यपाल से चर्चा की। रावत के अनुसार गोबर से बायोगैस और जैव-उर्वरक जैसे उत्पाद तैयार करने के साथ आधुनिक तकनीक एवं शोध के माध्यम से इसमें मौजूद सेल्यूलोज और लिग्निन जैसे घटकों का उपयोग मूल्यवर्धित उत्पाद बनाने में किया जा सकता है।

रावत ने सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) से निकलने वाले अवशेषों के वैज्ञानिक प्रबंधन और उनके संभावित उपयोग पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि स्थानीय संसाधनों के बेहतर प्रबंधन और तकनीकी उपयोग से ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा सकता है।

राज्यपाल गुरमीत सिंह ने कहा कि उत्तराखण्ड जैसे पर्वतीय राज्य में स्थानीय संसाधनों का वैज्ञानिक, तकनीकी और पर्यावरणीय दृष्टि से उचित उपयोग ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ाने और पलायन की चुनौती को कम करने में भी मदद मिल सकती है।

उन्होंने इस दिशा में विश्वविद्यालयों और शोध संस्थानों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए स्थानीय संसाधनों की संभावनाओं का अध्ययन करने तथा उनके आधार पर व्यावहारिक और टिकाऊ मॉडल विकसित करने पर जोर दिया।

राज्यपाल से दूसरी शिष्टाचार भेंट में प्रो. गोविंद सिंह ने राज्य से जुड़े समसामयिक विषयों पर चर्चा की। दोनों के बीच प्रदेश से संबंधित विभिन्न मुद्दों और उनकी प्रभावी प्रस्तुति एवं संवाद से जुड़े पहलुओं पर भी विचार-विमर्श हुआ।

राज्यपाल ने कहा कि उत्तराखण्ड के विकास के लिए स्थानीय संसाधनों, संस्थागत क्षमता और शोध आधारित नवाचारों को एक-दूसरे से जोड़ना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों की विशिष्ट परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए स्थानीय स्तर पर रोजगार और आजीविका के स्थायी अवसर विकसित किए जाने चाहिए।