सांस की नली में फंसा पांच रुपये का सिक्का, एंडोस्कोपी से निकाला
ऊना, 16 अगस्त । आर्य अस्पताल मैहतपुर में चिकित्सकों ने एक तीन वर्षीय बच्ची के सांस और भोजन की नली के बीच फंसे पांच रुपये के सिक्के को सफलतापूर्वक एंडोस्कोपिक प्रक्रिया के माध्यम से बाहर निकालकर उसे गंभीर खतरे से बचाया। समय पर उपचार मिलने से बच्ची की स्थिति अब सामान्य बताई जा रही है।
रामपुर (ऊना) निवासी अजय कुमार की तीन वर्षीय बेटी दर्शिनी ने खेलते समय पांच रुपये का सिक्का निगल लिया था। सिक्का सांस की नली और भोजन की नली के बीच फंस जाने के कारण बच्ची को परेशानी होने लगी। परिजन उसे तत्काल उपचार के लिए आर्य अस्पताल मैहतपुर लेकर पहुंचे।
अस्पताल में चिकित्सकीय जांच के दौरान पता चला कि सिक्का ऐसी संवेदनशील जगह पर फंसा हुआ था, जहां थोड़ी सी भी देरी गंभीर समस्या पैदा कर सकती थी। स्थिति को देखते हुए अस्पताल के डॉ. के. आर. आर्य ने एंडोस्कोपिक रिमूवल की प्रक्रिया करने का निर्णय लिया।
चिकित्सकीय टीम ने विशेष सावधानी के साथ एंडोस्कोप की सहायता से सिक्के को बाहर निकाला। प्रक्रिया सफल रही और बच्ची को किसी बड़ी जटिलता से बचा लिया गया। सिक्का बाहर निकलने के बाद बच्ची की हालत में सुधार हुआ और चिकित्सकों ने उसे निगरानी में रखा।
चिकित्सकों के अनुसार छोटे बच्चों में सिक्के, बटन, खिलौनों के छोटे हिस्से तथा अन्य छोटी वस्तुएं निगल लेने की घटनाएं गंभीर हो सकती हैं। यदि ऐसी वस्तु श्वास नली के आसपास या भोजन नली में फंस जाए तो सांस लेने में परेशानी, दम घुटने अथवा अन्य गंभीर जटिलताएं पैदा हो सकती हैं। ऐसे मामलों में घरेलू स्तर पर वस्तु निकालने का प्रयास करने के बजाय बच्चे को तुरंत विशेषज्ञ चिकित्सक के पास ले जाना चाहिए।
डॉ. के. आर. आर्य ने अभिभावकों से अपील की कि छोटे बच्चों को सिक्कों और अन्य छोटी वस्तुओं से दूर रखें तथा खेलते समय बच्चों पर विशेष निगरानी रखें। उन्होंने कहा कि यदि किसी बच्चे द्वारा कोई वस्तु निगल लेने की आशंका हो तो समय पर चिकित्सकीय जांच करवाना बेहद जरूरी है।

