कैथल: खेताें में न जलें फसल अवशेष, प्रशासन ने शुरु किया अभियान
कैथल, 11 सितंबर । धान की कटाई के बाद खेतों में बचने वाले फसल अवशेष किसान न जलाएं, इसके लिए प्रशासन ने अभी से कसरत शुरु कर दी है। कृषि विज्ञान केंद्र कैथल के वैज्ञानिक एवं फसल अवशेष प्रबंधन के नोडल अधिकारी डॉ. अमित कुमार ने शुक्रवार को गांव चक्कू लदाना में ग्राम स्तरीय फसल अवशेष प्रबंधन कार्यक्रम का आयाेजन किया। इस दाैरान उन्हाेंने कहा कि फसल अवशेष किसानों के लिए परेशानी नहीं, बल्कि मिट्टी की सेहत सुधारने का उपयोगी साधन साबित हो सकते हैं। जरूरत है कि किसान पराली को आग लगाने के बजाय आधुनिक कृषि तकनीकों के माध्यम से उसका खेत में ही प्रबंधन करें। इससे जहां मिट्टी की उर्वरा शक्ति बनी रहती है, वहीं पर्यावरण को होने वाले नुकसान से भी बचा जा सकता है।
उन्होंने किसानों को पराली के यथास्थान प्रबंधन के फायदे बताते हुए कहा कि खेत में फसल अवशेष मिलाने से मिट्टी में जैविक कार्बन की मात्रा बढ़ती है। इससे मिट्टी की गुणवत्ता और उर्वरता में सुधार होता है तथा लंबे समय में खेती की लागत कम करने में भी मदद मिल सकती है।
उन्होंने कहा कि किसानों को पराली जलाने की बजाय उपलब्ध कृषि मशीनरी का इस्तेमाल करना चाहिए। सरकार की ओर से फसल अवशेष प्रबंधन के लिए विभिन्न मशीनें अनुदान पर उपलब्ध करवाई जा रही हैं, जिनका किसान लाभ उठा सकते हैं।
कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. जसबीर सिंह ने किसानों को फसल अवशेष जलाने से होने वाले नुकसान के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि धान के अवशेषों में आग लगाने से वायु प्रदूषण बढ़ता है और निकलने वाला धुआं मानव स्वास्थ्य के लिए भी हानिकारक है।कार्यक्रम में प्रगतिशील किसान जोधा राम सहित गांव के 75 से अधिक किसानों ने भाग लिया।

