Himachal Pradesh

सांसद कंगना के बर्ताव पर बीडीओ संघ का पलटवार, कहा- अभद्र भाषा बर्दाश्त नहीं, बड़े नेताओं ने भी नहीं किया समर्थन

मंडी, 8 सितंबर । मंडी संसदीय क्षेत्र की सांसद कंगना रणौत द्वारा दो दिन पूर्व जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति (दिशा) की बैठक में सांसद निधि के कार्यों को लेकर अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। विपक्ष के हमलावर होने के बाद अब हिमाचल प्रदेश खंड विकास अधिकारी संघ ने भी सांसद की भाषा शैली पर कड़ी आपत्ति जताई है।

संघ के अध्यक्ष जी.सी. पाठक और महासचिव गौरव धीमान ने संयुक्त बयान में कहा कि दिशा समिति विकास योजनाओं की समीक्षा और समाधान के लिए गरिमापूर्ण मंच है। जनप्रतिनिधियों द्वारा अधिकारियों से जवाबदेही मांगना लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा है, लेकिन समीक्षा के दौरान अधिकारियों को खड़ा कर उनकी गरिमा को ठेस पहुंचाना और मनोबल तोड़ने वाली भाषा का इस्तेमाल करना स्वीकार्य नहीं है।

संघ ने दावा किया कि मंडी जिले में सांसद निधि के तहत कुल 237 कार्यों के लिए 511.71 लाख रुपये स्वीकृत हैं। इनमें 68 कार्य पूरे हो चुके हैं, जबकि 143 पर काम जारी है और केवल 26 कार्य शुरू नहीं हुए हैं। यानी करीब 89 प्रतिशत कार्य या तो पूरे हो चुके हैं या प्रगति पर हैं। वहीं, बीडीओ कार्यालयों से जुड़े 212 कार्यों में से 57 पूरे, 142 प्रगति पर और केवल 13 अप्रारंभ हैं। संघ के अनुसार करीब 94 प्रतिशत कार्यों पर कार्रवाई शुरू हो चुकी है।

संघ ने कहा कि देरी के कई व्यावहारिक कारण हैं। इसी वित्तीय वर्ष में 72 नए कार्य स्वीकृत हुए हैं, जिनमें 56 कार्य अप्रैल में मिले। इसके अलावा ई साक्षी पोर्टल पर सांसद निधि से संबंधित पूरी प्रक्रिया में बदलाव हुआ है, जिसके कारण संक्रमणकाल में तकनीकी दिक्कतें आईं। कई कार्य जमीन, वन अनुमति, एनओसी, न्यायिक मामलों और पंचायत स्तर की समस्याओं के कारण भी अटकते हैं।

बीडीओ संघ ने यह भी कहा कि पिछले वर्ष प्राकृतिक आपदा के दौरान अधिकारियों ने राहत, पुनर्वास और ग्रामीण संपर्क बहाली में दिन-रात काम किया। पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने और 2026 में पंचायत चुनावों की आचार संहिता के कारण भी विकास कार्य प्रभावित हुए।

संघ ने स्पष्ट किया कि वह जवाबदेही से पीछे नहीं हट रहा है, लेकिन समीक्षा तथ्यों और सम्मानजनक भाषा में होनी चाहिए। संघ ने चेतावनी दी कि भविष्य में अधिकारियों के साथ अभद्र व्यवहार सहन नहीं किया जाएगा और ऐसी स्थिति दोहराने पर कड़ा कदम उठाने से गुरेज नहीं किया जाएगा।