कानपुर में 150 लोगों की हड्डियों की जांच, 75 में हड्डियों की कमजोरी मिली : डॉ. सीमा द्विवेदी
कानपुर, 01 अक्टूबर । समय पर जांच और सही जीवनशैली अपनाकर हड्डियों से जुड़ी गंभीर समस्याओं का खतरा कम किया जा सकता है। बढ़ती उम्र के साथ हड्डियों की नियमित जांच जरूरी है, ताकि कमजोरी का समय रहते पता लगाकर उपचार और चिकित्सकीय सलाह ली जा सके।
यह बातें यूआईएसईएमएच की विभागाध्यक्ष डॉ. सीमा द्विवेदी ने गुरुवार को प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग की ओर से आयोजित हड्डियों की खनिज घनत्व जांच एवं अस्थिक्षय रोग जागरूकता कार्यक्रम में कहीं। इस शिविर में करीब 150 लोगों की हड्डियों की खनिज घनत्व जांच की गई। इनमें 120 प्रतिभागियों के विस्तृत आंकड़े उपलब्ध रहे। जांच में 38 लोगों की हड्डियों की मजबूती सामान्य मिली, जबकि 75 में सामान्य से कम और सात में अस्थिक्षय रोग की स्थिति पाई गई। कुल प्रतिभागियों में 62.5 प्रतिशत में हड्डियों की कमजोरी और 5.8 प्रतिशत में अस्थिक्षय रोग मिला।
कार्यक्रम में अस्थि रोग विभाग के डॉ. प्रग्नेश ने हड्डियों के स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी दी। प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग की डॉ. प्रतिमा वर्मा और डॉ. मीनाक्षी शर्मा ने महिलाओं में अस्थिक्षय रोग के जोखिम और बचाव के उपाय बताए। 40 से 49 वर्ष आयु वर्ग के 40 प्रतिभागी रहे। पूरे समूह का औसत हड्डी घनत्व अंक करीब -1.19 दर्ज किया गया।
विशेषज्ञों ने बताया कि हड्डियों की कमजोरी में उनकी मजबूती सामान्य से कम हो जाती है और यह आगे चलकर अस्थिक्षय रोग का रूप ले सकती है। अस्थिक्षय रोग में हड्डियां कमजोर और भुरभुरी हो जाती हैं, जिससे मामूली चोट या गिरने पर भी हड्डी टूटने का खतरा बढ़ जाता है। कार्यक्रम में भारतीय शोध आंकड़ों का भी उल्लेख किया गया। भारतीय रजोनिवृत्त महिलाओं पर किए गए एक व्यवस्थित समीक्षा एवं संयुक्त विश्लेषण में कमर की रीढ़ की हड्डी में अस्थिक्षय रोग की व्यापकता करीब 29 प्रतिशत और हड्डियों की कमजोरी की करीब 37 प्रतिशत बताई गई। वहीं, भारतीय स्वस्थ प्रतीत होने वाली आबादी के एक अध्ययन में अस्थिक्षय रोग की व्यापकता 6.9 प्रतिशत और हड्डियों की कमजोरी की 34 प्रतिशत पाई गई।
विशेषज्ञों के अनुसार बढ़ती उम्र, रजोनिवृत्ति के बाद हार्मोनल बदलाव, परिवार में अस्थिक्षय रोग या हड्डी टूटने का इतिहास, कम वजन, कैल्शियम व विटामिन-डी की कमी, शारीरिक निष्क्रियता, धूम्रपान, अधिक शराब और लंबे समय तक स्टेरॉयड दवाओं का सेवन जोखिम बढ़ा सकता है। संतुलित आहार, पर्याप्त कैल्शियम व प्रोटीन, उचित विटामिन-डी और नियमित व्यायाम अपनाने की सलाह दी गई। बुजुर्गों में गिरने से बचाव पर भी जोर दिया गया।
कार्यक्रम डॉ. सीमा द्विवेदी के निर्देशन में हुआ। समन्वय में डॉ. फरहीन सिद्दीकी और डॉ. प्रीति सिंह की भूमिका रही। डॉ. नीना गुप्ता, डॉ. शैली अग्रवाल, डॉ. पाविका लाल, डॉ. दिव्या द्विवेदी, डॉ. सीमा निगम समेत संकाय सदस्य, नर्सिंग स्टाफ, कनिष्ठ चिकित्सक और कर्मचारी मौजूद रहे।

