Rajasthan

लोकतांत्रिक विरोध की मर्यादा बनाए रखने की मांग, राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन

अजमेर, 01 अक्टूबर(हि.सं.)। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के आगरा स्थित पैतृक आवास के बाहर 28 सितंबर को प्रदर्शन के दौरान कथित रूप से गेट एवं दीवारों पर कालिख पोतने तथा आपत्तिजनक नारे लिखे जाने की अंतरराष्ट्रीय वैश्य महासम्मेलन, अजमेर इकाई एवं माथुर वैश्य शाखा सभा सहित वैश्य समाज ने निंदा की है। समाज के प्रतिनिधियों ने गुरुवार को जिला कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट के माध्यम से राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा।

ज्ञापन में कहा गया कि लोकतंत्र में विरोध और असहमति प्रत्येक नागरिक का अधिकार है, लेकिन किसी संवैधानिक पदाधिकारी के निजी आवास को विरोध का स्थल बनाना तथा परिवार के सदस्यों को ऐसी परिस्थितियों का सामना करना लोकतांत्रिक मर्यादाओं एवं सामाजिक शिष्टाचार की दृष्टि से उचित नहीं है। समाज ने घटना की निष्पक्ष एवं विस्तृत जांच की मांग करते हुए उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज एवं वीडियो रिकॉर्डिंग के आधार पर आरोपिताें की पहचान कर कानून के अनुसार कार्रवाई की मांग की।

प्रतिनिधियों ने कहा कि राजनीतिक अथवा वैचारिक असहमति लोकतंत्र का स्वाभाविक हिस्सा है, लेकिन विरोध की अभिव्यक्ति किसी व्यक्ति अथवा उसके परिवार की गरिमा और निजता को प्रभावित नहीं करनी चाहिए। उन्होंने भविष्य में संवैधानिक पदाधिकारियों एवं उनके परिवारों के निजी आवास पर ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए आवश्यक सुरक्षा एवं प्रशासनिक व्यवस्था सुनिश्चित करने का आग्रह किया।

पत्रकारों से बातचीत में सुनील दत्त जैन एवं पुखराज पहाड़िया ने कहा कि ज्ञापन किसी राजनीतिक दल के समर्थन या विरोध में नहीं, बल्कि संवैधानिक संस्थाओं के सम्मान, कानून के शासन और सामाजिक मर्यादाओं की रक्षा के उद्देश्य से दिया गया है। उन्होंने कहा, “विचारों का विरोध लोकतंत्र की शक्ति है, लेकिन किसी परिवार का अपमान लोकतंत्र की मर्यादा नहीं।”

ज्ञापन देने वालों में कालीचरण दास खंडेलवाल, रमेश तापड़िया, उमेश गर्ग, सूरज नारायण लखोटिया, प्रवीण जैन, महेंद्र गुप्ता, राजीव गुप्ता सहित बड़ी संख्या में समाजबंधु उपस्थित रहे।