गधों का मेला 16 से जयपुर में, गधों, घोड़ों और खच्चर का होता लाखाें का काराेबार
जयपुर, 15 अक्टूबर । राजस्थान की धरती अपनी अनूठी लोक परंपराओं और मेलों के लिए पूरी दुनिया में जानी जाती है। इन्हीं अनोखी परंपराओं में से एक है जयपुर के पास गोनेर रोड स्थित भावगढ़ बंध्या में लगने वाला श्री खलकाणी माता गर्दभ मेला है। यह मेला अपनी विशेष पहचान रखता है और आम मेलों से अलग इस मेले में गधे और खच्चर आकर्षण का प्रमुख केंद्र होते थे। यहां पशुओं की खरीद-फरोख्त के साथ धार्मिक आस्था, लोक मान्यताएं और ग्रामीण संस्कृति का अनूठा संगम देखने को मिलता है। इस बार यह चार दिवसीय मेला 16 से 19 अक्टूबर तक आयोजित हो रहा है। मेला स्थल घोड़े घोडिय़ों और पशुपालकों से अट चुका है।
चार दिवसीय मेले में गधों और घोड़े के व्यापार के साथ कई प्रकार की प्रतियोगिताएं आयोजित की जाती है। अब तक यहां पर करीब 500 से अधिक गधे, घोड़े और खच्चर आ चुके है। यहां पर बड़ी संख्या में दुकानें भी सज चुकी है। यहां पर देश के साथ प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से व्यापारी आते है। प्राप्त जानकारी के अनुसार मेले में 1996 तक केवल गधों और खच्चरों की ही खरीद फरोख्त होती थी। घोड़े केवल दौड़ और प्रदर्शन के लिए ही आते थे। धीरे धीरे घोड़ों की संख्या बढऩे लगी और इनकी भी खरीद फरोख्त होने लगी। कुछ दशकों तक इनका कोई खास व्यापार नहीं होता था। लेकिन धीरे धीरे यह मेला पुष्कर मेले का पर्याय बनने लगा। मेले में अब अच्छी नस्लों के घोड़े घोड़ी आने लगे है। मेले में सफेद रंग के अश्वों की अच्छी मांग रहती है। मेला अब करीब 5 दिन भरता है। रोक के बावजूद कोरोना काल मे भी मेला आयोजित किया गया।


