अरावली संरक्षण पर डूंगरपुर में हाई पावर कमेटी का संवाद, जनजातीय भूमि अधिकार और अवैध खनन के मुद्दे उठे
डूंगरपुर, 11 अक्टूबर । अरावली पर्वतमाला के संरक्षण, अवैध खनन पर रोक और प्राकृतिक संसाधनों के सतत उपयोग को लेकर रविवार को डूंगरपुर में हाई पावर कमेटी ने विभिन्न हितधारकों के साथ संवाद किया। शिवाजी नगर स्थित अंबेडकर भवन में आयोजित परामर्श कार्यक्रम में जनजातीय परिवारों के भूमि अधिकार, स्थानीय आजीविका, खनन प्रभावित क्षेत्रों के पुनर्वास और वन्यजीव संरक्षण से जुड़े मुद्दे उठे। हितधारकों ने अरावली क्षेत्र के संरक्षण और विकास के बीच संतुलन बनाने के लिए समिति को सुझाव दिए।
सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों की पालना में गठित समिति की अध्यक्ष एवं भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद (आईसीएफआरई), देहरादून की महानिदेशक कंचन देवी के नेतृत्व में पर्यावरणविदों, स्थानीय प्रतिनिधियों और विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोगों ने विचार रखे। जिला प्रशासन की ओर से समिति के सदस्यों का पगड़ी पहनाकर स्वागत किया गया।
परामर्श में हितधारकों ने कहा कि अरावली पर्वतमाला प्राकृतिक धरोहर होने के साथ स्थानीय समुदायों की आस्था, संस्कृति और आजीविका से भी जुड़ी है। बंशीलाल कटारा ने खनन से प्रभावित क्षेत्रों में बने गड्ढों का पुनर्भरण कराने, खनन गतिविधियों में निर्धारित मानकों की पालना सुनिश्चित करने और ग्राम सभाओं के जरिए संरक्षण कार्यों को बढ़ावा देने का सुझाव दिया। उन्होंने वन क्षेत्रों में लंबे समय से निवासरत जनजातीय परिवारों को नियमानुसार भूमि पट्टे जारी करने की जरूरत भी बताई। शंकरलाल रोत ने भी जनजातीय परिवारों के भूमि अधिकारों का मुद्दा उठाया।
हितधारकों ने अरावली क्षेत्र में अवैध खनन पर प्रभावी कार्रवाई, पौधरोपण बढ़ाने और पर्यावरणीय संतुलन को ध्यान में रखकर विकास कार्य करने की जरूरत बताई। वीरेन्द्र सिंह बेडसा ने मोरन नदी की प्राकृतिक सुंदरता बनाए रखने और उसे पुनर्जीवित करने के लिए कदम उठाने का सुझाव दिया। हररतन डामोर और पल्लव पटेल ने अवैध खनन पर कार्रवाई की मांग की।
ईश्वरलाल कटारा ने पर्वतीय क्षेत्रों की परिस्थितियों के अनुकूल उन्नत किस्म की घास विकसित करने, जबकि रूपलाल डामोर ने अरावली की परिभाषा और पहचान में एकरूपता बनाए रखने का सुझाव दिया। मांगीलाल मुनोत, खीवसिंह राजपुरोहित, नारायणलाल रोत सहित अन्य हितधारकों ने विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाने तथा वृक्षारोपण को बढ़ावा देने पर जोर दिया। मधुलिका ने वन्यजीवों और प्रकृति के बीच संतुलन बनाए रखने की बात कही।
रामकुसुम रावत ने अरावली को हुए नुकसान का आकलन करने और खनन प्रभावित क्षेत्रों में सिलिकोसिस जैसी बीमारी से बचाव के प्रभावी उपाय करने का सुझाव दिया। अन्य प्रतिनिधियों ने भी स्थानीय समुदायों के हितों और प्राकृतिक संसाधनों के सतत उपयोग से जुड़े मुद्दे उठाए।
समिति अध्यक्ष कंचन देवी ने कहा कि अरावली क्षेत्र में रहने वाले समुदायों की समस्याओं, जरूरतों और आजीविका से जुड़े पहलुओं को समझने के लिए हितधारकों और आमजन से सुझाव लिए जा रहे हैं। प्राप्त सुझावों और क्षेत्रीय जानकारियों का संकलन एवं विश्लेषण कर रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएगी। इसका उद्देश्य अरावली के संरक्षण के साथ स्थानीय समुदायों के हितों और क्षेत्रीय विकास के बीच संतुलन स्थापित करने के लिए प्रभावी पहल करना है।
कार्यक्रम में जिला कलेक्टर देशलदान, जिला पुलिस अधीक्षक मनीष, उप वन संरक्षक मोहित गुप्ता, अतिरिक्त जिला कलेक्टर प्रकाश चंद्र रेगर, उपखंड अधिकारी सोनू कुमार गुर्जर सहित वन, पुलिस, खनन और अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी, पर्यावरण प्रेमी तथा विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।


