Rajasthan

एसोसिएट प्रोफेसर के पदस्थापन को लेकर दिए आदेश की पालना नहीं हुई तो होंगे गंभीर परिणाम-हाईकोर्ट

जयपुर, 17 अक्टूबर । राजस्थान हाईकोर्ट ने दौसा जिले में कार्यरत एसोसिएट प्रोफेसर के तबादला आदेश पर अधिकरण की रोक के बावजूद उसका तबादला दूसरी जगह करने को गंभीरता से लिया है। इसके साथ ही अदालत ने तबादला आदेश को रद्द करते हुए उसे पूर्व की जगह कार्य करने को कहा है। जस्टिस अनूप कुमार की एकलपीठ ने यह आदेश कैलाश मीणा की याचिका पर दिए। अदालत ने स्पष्ट किया है कि यदि पदस्थापन को लेकर दिए आदेश की पालना नहीं की गई तो इसे गंभीरता से लिया जाएगा।

याचिका में अधिवक्ता विजय पाठक ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता दौसा के राजकीय कॉलेज में एसोसिएट प्रोफेसर के तौर पर कार्यरत है। गत दस जुलाई को उसका तबादला टोंक की देवली की कॉलेज में कर दिया। जिसे याचिकाकर्ता ने अपना रिटायरमेंट नजदीक होने के आधार पर चुनौती दी थी। जिस पर अधिकरण ने सुनवाई करते हुए तबादला आदेश को स्टे कर दिया और राज्य सरकार को छूट दी की नियमानुसार उसका जिले के भीतर तबादला किया जा सकता है। याचिका में कहा गया कि कॉलेज शिक्षा विभाग ने अधिकरण के आदेश के बाद उसे दौसा में कार्यग्रहण नहीं कराया और 7 अक्टूबर को उसका तबादला बांदीकुई कर दिया। जिसे चुनौती देते हुए कहा गया कि याचिकाकर्ता का रिटायरमेंट नजदीक होने के कारण उसका तबादला नहीं किया जा सकता। इसके अलावा अधिकरण ने नियमानुसार तबादला करने की स्वतंत्रता दी थी। जिसका अर्थ है कि उसे सामान्य तरीके से तबादला किया जाता, लेकिन वर्तमान में तबादलों पर बैन चल रहा है। ऐसे में सामान्य तबादले नहीं हो सकते। इसलिए विभाग के आदेश को रद्द किया जाए। जिस पर सुनवाई करते हुए एकलपीठ ने याचिकाकर्ता के तबादला आदेश को रद्द करते हुए पालना नहीं करने पर गंभीरता से लेने की चेतावनी दी है।