37 साल की सेवा के बाद जेडीए वाहन चालक को नियमित करने के आदेश
जोधपुर, 02 अक्टूबर । औद्योगिक न्यायाधिकरण एवं श्रम न्यायालय, जोधपुर महानगर के न्यायाधीश देवेंद्र सिंह नागर ने जोधपुर विकास प्राधिकरण में वर्ष 1989 से वाहन चालक के पद पर कार्यरत मेघाराम सैन के पक्ष में निर्णय सुनाते हुए उन्हें 1 जनवरी 1994 से नियमित नियुक्ति, नियमित वेतनमान और अन्य परिलाभ देने के आदेश दिए हैं। पूर्व में किए गए भुगतान को समायोजित किया जा सकेगा।
प्रार्थी मेघाराम सैन की ओर से अधिवक्ता किशोर कुमार व्यास ने न्यायालय में पक्ष रखते हुए बताया कि मेघाराम वर्ष 1989 से तत्कालीन नगर सुधार न्यास, जोधपुर में मस्टररोल पर चालक के पद पर कार्यरत थे। उनके कार्य और सेवाओं से संतुष्ट होकर न्यास ने उनकी सेवाएं लगातार जारी रखीं। वर्तमान में भी वे जोधपुर विकास प्राधिकरण में निरंतर सेवाएं दे रहे हैं। अधिवक्ता ने न्यायालय को बताया कि मेघाराम ने विभिन्न चुनावों के दौरान चालक के रूप में अपनी जिम्मेदारियां निभाईं। कोविड जैसी वैश्विक महामारी के दौरान भी उन्होंने प्राधिकरण को सेवाएं दीं। उनके उल्लेखनीय कार्यों के लिए प्राधिकरण के अधिकारियों ने समय-समय पर प्रशस्ति पत्र जारी किए। जिला कलेक्टर, जोधपुर की ओर से भी उन्हें 26 जनवरी 2024 को प्रशस्ति पत्र प्रदान किया गया था।
अधिवक्ता के अनुसार, लंबे समय तक सेवाएं देने के बावजूद मेघाराम को चालक के पद पर नियमित नहीं किया गया और न ही नियमित वेतनमान एवं अन्य परिलाभ दिए गए। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि जोधपुर विकास प्राधिकरण में चालक के छह पद रिक्त होने के बावजूद उनकी सेवाओं को नियमित नहीं करना विधिक प्रावधानों के प्रतिकूल और अनुचित श्रम आचरण है। दोनों पक्षों को सुनने के बाद औद्योगिक न्यायाधिकरण एवं श्रम न्यायालय ने मेघाराम सैन को 1 जनवरी 1994 से चालक के पद पर नियमित नियुक्ति, नियमित वेतनमान और संबंधित परिलाभ प्राप्त करने का अधिकारी माना। साथ ही, पूर्व में किए गए भुगतान को समायोजित करने की अनुमति दी।

