जुर्माना भरते ही वाहन छोड़ना होगा, बेमियाद कब्जे में नहीं रख सकते अधिकारी
जयपुर, 05 नवंबर । राजस्थान हाईकोर्ट ने जीएसटी से जुड़े एक मामले में स्पष्ट किया है कि वाहन पर निर्धारित जुर्माना और शास्ति की पूरी राशि जमा होने के बाद अधिकारियों को उसे कब्जे में रखने या जब्ती की कार्रवाई जारी रखने का अधिकार नहीं है। सीजे संजय के. अग्रवाल और न्यायाधीश समीर जैन की खंडपीठ ने यह आदेश नीलम ननेचा की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। अदालत ने कहा कि माल के मालिक की धोखाधड़ी या गलत घोषणा के लिए वाहन मालिक को अनिश्चितकाल तक जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। कानून किसी व्यक्ति से ऐसा काम करने की अपेक्षा नहीं करता, जिसे करना उसके लिए असंभव हो। हालांकि अदालत ने माल के संबंध में विभाग को नियमानुसार जब्ती और निस्तारण की छूट दी है।
याचिका में अधिवक्ता देवेंद्र शर्मा ने बताया कि जीएसटी अधिकारियों ने याचिकाकर्ता का वाहन हिरासत में ले लिया था। वाहन और उसमें लदे माल के संबंध में 10 अक्टूबर 2026 को पारित आदेश से 71,686 रुपए की शास्ति और जुर्माना लगाया गया। याचिकाकर्ता ने पूरी राशि जमा करा दी, लेकिन इसके बावजूद वाहन अधिकारियों के कब्जे में रहा। याचिका में कहा गया कि वाहन से संबंधित जुर्माना जमा कराने के बाद माल में रखी वस्तुओं के कर या जुर्माने की अदायगी नहीं होने के लिए वाहन मालिक को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।


