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सिक्किम के शहीद लेफ्टिनेंट का पार्थिव शरीर अयोध्या पहुंचा, आज होगा अंतिम संस्कार!

सिक्किम में शहीद हुए लेफ्टिनेंट शशांक तिवारी का पार्थिव शरीर हाल ही में अयोध्या पहुंचा है। महर्षि वाल्मीकि एयरपोर्ट पर सेना और पुलिस के उच्च अधिकारियों की उपस्थिति में उन्हें सेना सम्मान के साथ मिलिट्री हॉस्पिटल लाया गया जहाँ उनका अंतिम सम्मान किया गया। शनिवार की सुबह, उनका पार्थिव शरीर डोगरा रेजिमेंट के हॉस्पिटल से गद्दोपुर मझवा में ले जाया जाएगा, जहां राजकीय सम्मान के साथ उनकी अंतिम विदाई जमथरा घाट पर की जाएगी।

लेफ्टिनेंट शशांक की शहादत एक साहसी घटना से जुड़ी है। जब एक अग्निवीर साथी जवान गश्त के दौरान नदी में गिर गया, तो शशांक ने बिना किसी हिचकिचाहट के जल में कूदकर उसे बचाने का साहस दिखाया। उन्होंने साथी को सुरक्षित निकालने में तो सफलता पाई, लेकिन स्वयं अपनी जान गंवा दी। शशांक अपने परिवार के इकलौते पुत्र थे और उनके पिता मर्चेंट नेवी में कार्यरत हैं, जो इस समय अमेरिका में तैनात हैं। उन्होंने बेटे की शहादत की खबर सुनते ही भारत लौटने का निर्णय लिया और उम्मीद है कि वह जल्द ही अयोध्या पहुंचेंगे।

शशांक की मां, नीता तिवारी, जिनकी स्वास्थ्य स्थिति अच्छी नहीं है, को बेटे की शहादत की सूचना नहीं दी गई है। वह हार्ट पेशेंट हैं और उन्हें इस संवेदनशील परिस्थिति में संभालना परिवार के लिए कठिन हो सकता है। उनके बड़े भाई और अन्य रिश्तेदार धीरे-धीरे घर पर इकठ्ठा हो रहे हैं, लेकिन यह तय किया गया है कि जब उनके पिता स्थल पर पहुंचेंगे, तभी मां को बेटे की शहादत की जानकारी दी जाएगी। शशांक के मामा, राजेश दुबे, ने बताया कि शशांक बचपन से ही देश सेवा की भावना से परिपूर्ण थे और उनकी अकादमिक उपलब्धियाँ भी सराहनीय रही हैं।

अयोध्या में शशांक के अंतिम दर्शन के लिए उनके घर के सामने तैयारियां की जा रही हैं। परिवार के सदस्य और पड़ोसी शोक में डूबे हुए हैं। घर के आसपास की जगह को साफ किया जा रहा है ताकि सभी लोग एक साथ शहीद को श्रद्धांजलि दे सकें। इस कठिन समय में परिवार की गोपनीयता बनाए रखने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शशांक के बलिदान को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि उनके स्मारक की स्थापना अयोध्या में की जाएगी। इसके साथ ही, राज्य सरकार परिवार को 50 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने का आश्वासन दिया है। इस दुखद घटना के बाद, लोगों में शहीदों के प्रति सम्मान और उनके परिवारों के प्रति संवेदना दिखाई दे रही है। आज, जब देश कठिनाइयों का सामना कर रहा है, ऐसे साहसी जवानों की कहानियाँ हमें प्रेरित करती हैं और उनके योगदान को हमेशा याद रखा जाएगा।