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गरीबी उन्मूलन के मॉडल रूप में उभरेगा यूपी, ग्लोबल साउथ के लिए बनेगा विकास मॉडल

लखनऊ, 11 फरवरी। दुनिया की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक अर्थव्यवस्था भारत के भीतर यदि कोई राज्य आज वैश्विक विकास बहस का विषय बन रहा है तो वह उत्तर प्रदेश है। वित्तीय वर्ष 2026–27 के बजट भाषण में राज्य सरकार ने दावा किया है कि प्रदेश में अब तक लगभग 6 करोड़ लोगों को बहुआयामी गरीबी से बाहर निकाला गया है। यह संख्या कई देशों की कुल आबादी से भी अधिक है।

वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने कहा कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था वर्ष 2024-25 में 30.25 लाख करोड़ रुपये (लगभग 365 अरब डॉलर के आसपास) आंकी गई है, जो 13.4 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि दर को दर्शाती है। प्रति व्यक्ति आय 1,09,844 रुपये तक पहुंच चुकी है, जो 2016-17 की तुलना में दोगुनी से अधिक है। 2025-26 में इसके 1,20,000 रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। साथ ही, प्रदेश की बेरोजगारी दर घटकर 2.24 प्रतिशत रह जाना भी विकास संकेतकों में महत्वपूर्ण सुधार का संकेत है।

उहोंने कहा कि गरीबी उन्मूलन, आय वृद्धि और उच्च आर्थिक विस्तार दर किसी भी उभरती अर्थव्यवस्था की मजबूती तय करते हैं। यदि उत्तर प्रदेश 24 करोड़ से अधिक आबादी वाले राज्य में इस गति को बनाए रखता है तो यह न केवल भारत के 10 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था लक्ष्य को गति देगा, बल्कि वैश्विक दक्षिण (ग्लोबल साउथ) के लिए विकास मॉडल के रूप में भी उभरेगा।

आर्थिक विशेषज्ञ एवं प्रोफेसर डॉ. विवेक निगम ने यूपी बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यदि विकास की यह गति बनी रहती है और आय वृद्धि का लाभ निचले तबकों तक सतत रूप से पहुंचता है तो उत्तर प्रदेश आने वाले वर्षों में गरीबी उन्मूलन के मॉडल के रूप में उभर सकता है।