Uttarakhand

जून तक खत्म होंगे सभी शिक्षक और कार्मिक अटैचमेंट,मूल विद्यालयों में लौटेंगे

देहरादून, 05 जून (हि. स.)। राज्य सरकार ने शिक्षा विभाग में लंबे समय से चल रहे शिक्षकों और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के अटैचमेंट को समाप्त करने का निर्णय लिया है। विद्यालयी शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि 30 जून तक सभी प्रकार के अटैचमेंट और सम्बद्धीकरण समाप्त कर संबंधित कार्मिकों को उनके मूल तैनाती स्थलों पर भेज दिया जाए।

शुक्रवार को शिक्षा मंत्री डॉ रावत ने कहा कि राजकीय विद्यालयों में मानव संसाधनों के प्रभावी उपयोग और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए यह कदम उठाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि कई शिक्षक और कर्मचारी वर्षों से अपने मूल विद्यालयों के बजाय विभिन्न स्कूलों, विभागीय कार्यालयों और अन्य विभागों में सम्बद्ध अथवा प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत हैं, जिससे विद्यालयों में शिक्षकों की कमी बनी हुई है और छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।

डॉ. रावत ने स्पष्ट किया कि निर्धारित समय सीमा के भीतर मूल तैनाती स्थल पर वापस नहीं लौटने वाले शिक्षकों के खिलाफ नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के सभी सम्बद्धीकरण आदेश भी तत्काल प्रभाव से निरस्त करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में किसी विशेष प्रशासनिक या शैक्षणिक आवश्यकता के तहत सम्बद्धीकरण किया भी गया तो उसकी अवधि एक शैक्षणिक सत्र से अधिक नहीं होगी। सरकार का उद्देश्य प्रत्येक विद्यालय में पर्याप्त शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित कर विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करना है।

शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने मध्याह्न भोजन योजना (मिड-डे मील) में कथित अनियमितताओं की शिकायतों का संज्ञान लेते हुए जांच के आदेश भी दिए हैं। उन्होंने हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर, नैनीताल के रामनगर और हल्द्वानी, पौड़ी के कोटद्वार तथा देहरादून के डोईवाला, रायपुर, विकासनगर और सहसपुर ब्लॉकों के विद्यालयों में मिड-डे मील व्यवस्था की जांच कराने के निर्देश दिए हैं।

मंत्री ने कहा कि शिकायतों में छात्र संख्या की तुलना में अधिक खाद्यान्न दर्ज करने तथा खाद्यान्न प्राप्ति और वास्तविक खपत में अंतर जैसी गंभीर अनियमितताओं की बातें सामने आई हैं। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों के पोषण से जुड़ी इस योजना में किसी भी प्रकार की लापरवाही या भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जांच में अनियमितता पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी।