आपदा प्रबंधन में उत्तराखंड को हरसंभव सहयोग देगा केंद्र : नित्यानंद राय
– उत्तराखंड को एसडीआरएफ के तहत 1012 करोड़ रुपये आवंटितदेहरादून, 07 जुलाई । केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने कहा कि केंद्र सरकार उत्तराखंड की आपदा प्रबंधन, राहत, पुनर्वास और पुनर्निर्माण संबंधी आवश्यकताओं के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है और राज्य को हरसंभव वित्तीय और तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराया जा रहा है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को भेजे पत्र में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री ने कहा कि आपदा प्रबंधन की प्राथमिक जिम्मेदारी राज्य सरकारों की होती है, लेकिन प्राकृतिक आपदाओं के दौरान केंद्र सरकार राहत एवं बचाव कार्यों के लिए आवश्यक वित्तीय और लॉजिस्टिक सहायता उपलब्ध कराती है। गंभीर प्राकृतिक आपदाओं की स्थिति में अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय दल के आकलन के आधार पर राष्ट्रीय आपदा मोचन निधि (एनडीआरएफ) से अतिरिक्त सहायता भी दी जाती है।
उन्होंने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए उत्तराखंड को राज्य आपदा मोचन निधि (एसडीआरएफ) के तहत 1,012 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जिसमें 911.20 करोड़ रुपये केंद्र सरकार और 100.80 करोड़ रुपये राज्य सरकार का अंश है। केंद्र सरकार अपने हिस्से की पूरी राशि दो किस्तों में जारी कर चुकी है। इसके अतिरिक्त एक अप्रैल, 2025 तक एसडीआरएफ खाते में 2,503.07 करोड़ रुपये की शेष राशि भी उपलब्ध थी।
नित्यानंद राय ने बताया कि वर्ष 2025 में बादल फटने की घटनाओं के बाद केंद्र सरकार ने राज्य सरकार के ज्ञापन की प्रतीक्षा किए बिना आठ अगस्त, 2025 को अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय दल का गठन किया था। इस दल ने सात से नौ सितंबर, 2025 तक प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर नुकसान का आकलन किया। राज्य सरकार से संशोधित ज्ञापन प्राप्त होने के बाद अतिरिक्त वित्तीय सहायता की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।
उन्होंने कहा कि पोस्ट डिजास्टर नीड्स असेसमेंट (पीडीएनए) के आधार पर उत्तराखंड सरकार ने 10,998.95 करोड़ रुपये की सहायता का अनुरोध किया था। निर्धारित मानकों के अनुरूप केंद्र सरकार ने 811.87 करोड़ रुपये की सहायता स्वीकृत की है। इसमें केंद्र सरकार के हिस्से की पहली किस्त के रूप में 182.67 करोड़ रुपये 26 मई, 2026 को जारी किए जा चुके हैं।
पत्र में भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (जीएसआई) की ओर से राज्य में भूस्खलन पूर्वानुमान प्रणाली को सुदृढ़ बनाने के प्रयासों का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि आवश्यकता पड़ने पर राज्य सरकार के अधिकारियों को राष्ट्रीय भूस्खलन पूर्वानुमान केंद्र, कोलकाता में तकनीकी अध्ययन के लिए भेजा जा सकता है। वन भूमि पर पुनर्वास के संबंध में उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप ही वन भूमि का उपयोग किया जा सकता है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखंड प्राकृतिक आपदाओं की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील राज्य है और प्रत्येक वर्ष आपदाओं से राज्य को व्यापक क्षति होती है। उन्होंने आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास के लिए राज्य को मिल रहे सहयोग पर प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री का आभार व्यक्त किया।

