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मध्य प्रदेश के 15 जिलों में आज भारी से अति भारी बारिश का अलर्ट, अगले चार दिन तेज बारिश के आसार

भोपाल, 22 जुलाई । मध्य प्रदेश में मानसून अब पूरी तरह सक्रिय नजर आ रहा है। पिछले 36 घंटों के दौरान प्रदेश के 35 से अधिक जिलों में अच्छी बारिश दर्ज की गई है। अगले चार दिनों तक प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में तेज बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। आज बुधवार को 15 जिलों के लिए भारी और अति भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। राजधानी भोपाल में भी मंगलवार रात से लगातार रिमझिम बारिश हो रही है।

मौसम विभाग ने शिवपुरी, गुना, सागर और डिंडौरी में अति भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। इन जिलों में अगले 24 घंटों के दौरान 4 से 8 इंच तक बारिश होने की संभावना जताई गई है। वहीं, श्योपुर, अशोकनगर, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, दमोह, नीमच, मंदसौर, उज्जैन, धार और बड़वानी में भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है।

भोपाल, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, इंदौर, झाबुआ, अलीराजपुर, बुरहानपुर, खंडवा, खरगोन, रतलाम, आगर-मालवा, शाजापुर, देवास, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, ग्वालियर, मुरैना, भिंड, दतिया, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी, बालाघाट, मंडला, रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज, मैहर, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर और निवाड़ी में कहीं हल्की तो कहीं तेज बारिश होने के आसार हैं।

लगातार हुई बारिश का असर प्रदेश के कुल वर्षा आंकड़ों पर भी दिखाई दिया है। सोमवार तक मध्य प्रदेश में सामान्य से 17 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई थी, जो मंगलवार तक घटकर 14 प्रतिशत रह गई। मौसम विभाग के अनुसार, अब तक प्रदेश में 286.8 मिमी (11.3 इंच) बारिश रिकॉर्ड की गई है, जबकि इस अवधि तक सामान्य रूप से 335.3 मिमी (13.2 इंच) वर्षा होनी चाहिए थी। पूर्वी मध्य प्रदेश में सामान्य से 18 प्रतिशत और पश्चिमी हिस्से में 11 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। फिलहाल प्रदेश के 41 जिलों में वर्षा का आंकड़ा सामान्य से कम बना हुआ है। पूर्वी क्षेत्र में निवाड़ी को छोड़कर लगभग सभी जिलों में सामान्य से कम बारिश हुई है, जबकि 14 जिलों में औसत से अधिक वर्षा दर्ज की गई है।

मौसम विभाग के अनुसार, प्रदेश में मानसून सक्रिय अवस्था में है। यदि बंगाल की खाड़ी से नमी की आपूर्ति और वर्तमान मौसमीय सिस्टम बने रहते हैं, तो मध्य प्रदेश के मध्य क्षेत्रों में आगामी दिनों में भी अच्छी बारिश जारी रह सकती है। इससे जल स्रोतों और कृषि को लाभ मिलेगा।