सिरसा की सुमित्रा बनीं झींगा पालन में महिला सशक्तिकरण की मिसाल
सिरसा, 22 जुलाई । हरियाणा के सिरसा जिला निवासी गृहिणी सुमित्रा ने जहां कभी खारे पानी और लवणीय भूमि के कारण खेती करना मुश्किल माना जाता था, इस चुनौती को अपनी सबसे बड़ी ताकत बना दिया। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) के तहत झींगा पालन में ऐसी सफलता हासिल की कि आज उनका नाम जिले की प्रेरणादायक महिला उद्यमियों में लिया जाता है। सुमित्रा ने मेहनत और मजबूत इरादों से राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना ली है।
सुमित्रा ने बुधवार को बताया कि उनका परिवार पहले पारंपरिक खेती पर निर्भर था, लेकिन क्षेत्र में भूजल की अधिक लवणता और नहरी पानी की कमी के कारण खेती लगातार घाटे का सौदा बनती जा रही थी। इसी दौरान उन्होंने झींगा पालन के बारे में जानकारी प्राप्त की। सुमित्रा ने प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत आवेदन किया। लगभग 14 लाख रुपये की परियोजना पर उन्हें 8.35 लाख रुपये की सब्सिडी प्रदान की गई। इस सहायता से उन्होंने एक हेक्टेयर क्षेत्र में दो झींगा तालाब स्थापित किए और वैज्ञानिक तरीके से सफेद झींगा का उत्पादन शुरू किया।
पहले ही वर्ष में सुमित्रा ने लगभग 10 टन झींगा उत्पादन किया और करीब 19 लाख रुपये का शुद्ध लाभ अर्जित किया। इस सफलता से उत्साहित होकर उन्होंने दूसरे वर्ष दो और तालाब तैयार किए, जिसके लिए उन्हें लगभग 8.40 लाख रुपये की अतिरिक्त सब्सिडी मिली। इसके बाद उनका वार्षिक उत्पादन बढकऱ 20 टन तक पहुंच गया। वित्तीय वर्ष 2023-24 में उनके उद्यम का वार्षिक कारोबार लगभग 68 लाख रुपये दर्ज किया गया। उनके फार्म से चार लोगों को प्रत्यक्ष तथा दस लोगों को अप्रत्यक्ष रोजगार भी मिला। सुमित्रा की सफलता ने कर्मशाना ही नहीं, बल्कि आसपास के क्षेत्रों के किसानों और महिलाओं को भी नई दिशा दिखाई है। गांव में अब तक लगभग 115 एकड़ क्षेत्र में झींगा पालन अपनाया जा चुका है। आज अनेक महिलाएं भी पारंपरिक खेती से आगे बढकऱ मत्स्य पालन और एक्वाकल्चर के क्षेत्र में रुचि दिखा रही हैं।
सुमित्रा की कहानी यह संदेश देती है कि प्राकृतिक चुनौतियां यदि अवसर में बदली जाएं तो वही भूमि, जिसे कभी कम उपजाऊ माना जाता था, रोजगार, आय और महिला सशक्तिकरण का मजबूत आधार बन सकती है। सुमित्रा की सफलता ने राष्ट्रीय स्तर पर भी विशेष पहचान बनाई है। उनकी सफलता की कहानी को नाबार्ड ने भी सुपर सक्सेस स्टोरी के लिए नामांकित किया, जिससे वे मत्स्य पालन के क्षेत्र में अन्य किसानों और विशेषकर महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत बन गई हैं।

