रीको की ई-लीज प्रणाली से उद्यमियों को मिलेगी राहत, लीज डीड का काम होगा ऑनलाइन
जयपुर, 10 अक्टूबर । औद्योगिक भूखंडों के लीज एग्रीमेंट के निष्पादन और पंजीयन के लिए उद्यमियों को अब बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने से राहत मिलने की उम्मीद है। राजस्थान राज्य औद्योगिक विकास एवं निवेश निगम (रीको) ने लीज डीड की प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाने के लिए ऑनलाइन ई-लीज प्रणाली लागू करने की पहल की है। इसके लिए रीको डिस्पोजल ऑफ लैंड रूल्स 1979 में संशोधन किया जा रहा है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत लीज एग्रीमेंट तैयार करने, सत्यापन, इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर और पंजीयन के लिए दस्तावेज भेजने जैसे कार्य रीको के ईआरपी पोर्टल के माध्यम से किए जाएंगे।
वर्तमान व्यवस्था में औद्योगिक भूखंड आवंटित होने के बाद लीज एग्रीमेंट का भौतिक रूप से निष्पादन करना पड़ता है। सामान्यतः संपूर्ण प्रीमियम का भुगतान होने के बाद 90 दिनों के भीतर फॉर्म ‘सी’ में लीज एग्रीमेंट निष्पादित किया जाता है। किस्तों में भूखंड आवंटित होने की स्थिति में आवंटन की तारीख से 90 दिनों के भीतर फॉर्म ‘डी’ में एग्रीमेंट निष्पादित करने का प्रावधान है। विशेष परियोजनाओं, विशेष आर्थिक क्षेत्र और गैर-औद्योगिक प्रयोजनों के लिए लीज एग्रीमेंट प्रबंधन द्वारा अनुमोदित प्रारूप में निष्पादित किए जाते हैं।
इस प्रक्रिया में आवंटियों को रीको के इकाई कार्यालय और संबंधित उप-पंजीयक कार्यालय में उपस्थित होना पड़ता है।
दूसरे राज्य या जिले में रहने वाले आवंटियों तथा कंपनियों के अधिकृत हस्ताक्षरकर्ताओं को विशेष रूप से परेशानी का सामना करना पड़ता है। दस्तावेजों की भौतिक आवाजाही, पहचान सत्यापन और पंजीकृत दस्तावेजों की स्थिति का पता लगाने जैसी समस्याओं को दूर करने के लिए डिजिटल व्यवस्था विकसित की जा रही है।
प्रस्तावित ई-लीज प्रणाली में लीज एग्रीमेंट से संबंधित विभिन्न चरण ऑनलाइन पूरे किए जाएंगे। सबसे पहले आवंटी के बकाया भुगतान की स्थिति की जांच होगी। इसके बाद अधिकृत हस्ताक्षरकर्ताओं का विवरण दर्ज किया जाएगा और आधार आधारित प्रमाणीकरण किया जाएगा। गवाहों का विवरण एवं सत्यापन, इकाई कार्यालय की जांच और लीज एग्रीमेंट तैयार करने की प्रक्रिया भी इसी प्रणाली के माध्यम से संचालित होगी।
इसके बाद आवंटी, गवाहों और रीको के अधिकृत अधिकारी द्वारा निर्धारित क्रम में इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर किए जाएंगे। दस्तावेज को सील करने के बाद पंजीयन के लिए संबंधित उप-पंजीयक कार्यालय को इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से भेजा जाएगा। इस प्रक्रिया में एक संदर्भ संख्या भी जारी होगी, जिसकी जानकारी आवंटी को मिलेगी। आवंटी इसी संख्या के आधार पर अपनी सुविधानुसार संबंधित उप-पंजीयक कार्यालय में समय लेकर उपस्थित हो सकेगा।
ई-लीज प्रणाली लागू होने के बाद भी पंजीयन से जुड़ी कुछ औपचारिकताओं के लिए कार्यालय में उपस्थित होना आवश्यक रहेगा। पंजीयन अधिनियम, 1908 के तहत बायोमेट्रिक पहचान और फोटोग्राफी के लिए आवंटी तथा गवाहों को संबंधित उप-पंजीयक कार्यालय जाना होगा।
उप-पंजीयक कार्यालय में स्टाम्प शुल्क और पंजीयन शुल्क जमा होने की पुष्टि तथा अन्य आवश्यक औपचारिकताएं पूरी होने के बाद लीज एग्रीमेंट का पंजीयन किया जाएगा। पंजीकृत दस्तावेज इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से रीको के इकाई कार्यालय को वापस भेजा जाएगा। इससे दस्तावेजों के आदान-प्रदान में लगने वाला समय कम होने और अभिलेखों का प्रबंधन बेहतर होने की उम्मीद है।
रीको की प्रस्तावित डिजिटल व्यवस्था का लाभ केवल नए लीज एग्रीमेंट तक सीमित नहीं रहेगा।
लीजहोल्ड अधिकारों के हस्तांतरण, संस्था के गठन में परिवर्तन, अनुमत गतिविधि में बदलाव तथा मूल पंजीकृत लीज एग्रीमेंट में संशोधन जैसी परिस्थितियों में पूरक या संशोधित लीज एग्रीमेंट के निष्पादन की प्रक्रिया को भी डिजिटल व्यवस्था के अनुरूप सरल बनाया जाएगा।
केंद्र और राज्य सरकार की ई-पंजीयन तथा ऑनलाइन सेवाओं को बढ़ावा देने की पहल के अनुरूप रीको की ई-लीज प्रणाली औद्योगिक भूखंडों से जुड़ी प्रक्रियाओं को अधिक सुविधाजनक बनाने में मददगार हो सकती है।
दस्तावेजों की भौतिक आवाजाही कम होने, सत्यापन प्रक्रिया व्यवस्थित होने और पंजीकृत दस्तावेजों की उपलब्धता आसान होने से उद्यमियों तथा निवेशकों को राहत मिलने की उम्मीद है।


