Himachal Pradesh

एचआरटीसी पेंशनर 3 नवंबर को निगम मुख्यालय का करेंगे घेराव, लंबित एरियर और पेंशन भुगतान में देरी से नाराजगी

शिमला, 13 अक्टूबर । हिमाचल पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) के पेंशनरों ने लंबित वित्तीय लाभों और पेंशन संबंधी समस्याओं को लेकर आंदोलन का ऐलान किया है। पेंशनर 3 नवंबर को निगम मुख्यालय का घेराव करेंगे। एचआरटीसी पेंशनर्ज संयुक्त संघर्ष समिति और शिमला इकाई ने इस संबंध में निगम के प्रबंध निदेशक को नोटिस सौंपा है। समिति ने लंबित मांगों पर जल्द कार्रवाई करने की मांग करते हुए चेतावनी दी है कि समस्याओं का समाधान नहीं होने पर आंदोलन तेज किया जाएगा।

आंदोलन की रणनीति तय करने के लिए मंगलवार को तारादेवी में शिमला इकाई की बैठक हुई। इसमें करीब 150 पेंशनरों ने हिस्सा लिया। बैठक में लंबित एरियर, नियमित पेंशन, चिकित्सा बिलों और सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाले वित्तीय लाभों के भुगतान में देरी पर नाराजगी जताई गई।

समिति के सचिव राजेंद्र ठाकुर और मीडिया प्रभारी बृजलाल ठाकुर ने कहा कि पेंशनर संगठनों ने सरकार से निगम के बजट में पेंशन के लिए पर्याप्त धनराशि का प्रावधान करने का आग्रह किया है। उनकी मांग है कि सेवानिवृत्त कर्मचारियों को हर महीने की पहली तारीख को पेंशन मिलनी चाहिए। पेंशनरों का कहना है कि लंबे समय से वित्तीय लाभ लंबित रहने के कारण उन्हें आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

बैठक के बाद संयुक्त संघर्ष समिति और शिमला इकाई के पदाधिकारियों ने निगम प्रबंधन से मुलाकात की और मुख्यालय के घेराव का नोटिस सौंपा। उन्होंने पेंशनरों की समस्याओं का प्राथमिकता के आधार पर समाधान करने की मांग उठाई। समिति का कहना है कि सेवानिवृत्त कर्मचारियों को अपने हक की राशि प्राप्त करने के लिए बार-बार निगम प्रबंधन के चक्कर नहीं काटने पड़ने चाहिए।

पेंशनरों की प्रमुख मांगों में 1 जनवरी, 2016 से लागू वेतनमान से संबंधित सभी प्रकार के एरियर का एकमुश्त भुगतान शामिल है। इसके साथ ही महंगाई भत्ते के लंबित एरियर, नए वेतनमान के आधार पर पेंशन निर्धारण से जुड़ी बकाया राशि और चिकित्सा बिलों का जल्द भुगतान करने की मांग की गई है। चालकों और परिचालकों की विशेष वेतन वृद्धि तथा पेंशनरों की एसीपी वेतन वृद्धि से संबंधित एरियर का भुगतान भी उनकी मांगों में शामिल है।

संयुक्त संघर्ष समिति के पदाधिकारियों के अनुसार पेंशनरों की समस्याओं को लेकर निगम प्रबंधन के साथ पहले भी पत्राचार और बैठकें हो चुकी हैं। 28 जुलाई को प्रबंध निदेशक के साथ हुई बैठक में कुछ मांगों पर सहमति बनी थी, लेकिन इसके बाद अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। इससे पेंशनरों में नाराजगी बढ़ी है।