Rajasthan

तबादलों को लेकर न्यायिक दखल सीमित, असाधारण मामलों में ही दी जा सकती है चुनौती-हाईकोर्ट

जयपुर, 22 अक्टूबर । राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा है कि तबादला सरकारी सेवा का अनिवार्य हिस्सा है और कोई कर्मचारी अपनी पसंद की जगह पर तैनात रहने का अधिकार नहीं रखता है। इसके अलावा ऐसे मामलों में अदालतों के पास न्यायिक दखल सीमित रूप में ही है। अदालत ने कहा की तबादला आदेश को केवल अत्यंत दुर्लभ स्थिति में ही चुनौती दी जा सकती है। जस्टिस अनूप कुमार ने यह आदेश मनोज कुमार गुप्ता व अन्य की ओर से दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए दिए।

अदालत ने कहा की तबादला आदेशों को चुनौती देने वाली याचिकाओं की बाढ़ आई हुई है। अधिकांश कर्मचारी अपनी ट्रांसफर की गई जगह पर कार्यभार संभालने के इच्छुक नहीं होते हैं, जिसके कारण वे अदालत या राजस्थान सिविल सेवा अपीलीय न्यायाधिकरण की शरण लेते हैं। इस प्रवृत्ति के चलते प्रशासनिक मशीनरी का कामकाज ठप हो रहा है और सरकारी कार्यप्रणाली बुरी तरह प्रभावित हो रही है। अदालत ने याचिकाकर्ताओं को छूट दी गई है कि वे दो सप्ताह के भीतर अपने संबंधित सक्षम प्राधिकारी को शिकायतों को लेकर विस्तृत अभ्यावेदन प्रस्तुत कर सकते हैं। अदालत ने सक्षम प्राधिकारी को दो सप्ताह में भीतर तर्कसंगत आदेश देने के निर्देश देते हुए तब तक तबादला आदेश को स्थगित रखा है।

– तबादला किसी कानूनी प्रावधान का हनन कर जारी किया गया हो।

– तबादला आदेश ऐसे अफसर ने जारी किया हो, जो इसके लिए सक्षम नहीं हो।

– यदि जीवन के लिए खतरा पैदा करने वाली बीमारी जैसी कठिनाई सहित अन्य कारण।