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परवीन बॉबी के 66 रीटेक से रात 2 बजे तक चली शूटिंग, मनोज कुमार के कजिन का खुलासा!

हिंदी सिनेमा के प्रसिद्ध अभिनेता, निर्माता, और निर्देशक मनोज कुमार अब हमारे बीच नहीं रह गए हैं। उनका निराशाजनक निधन 4 अप्रैल को हुआ। हाल ही में, उनके चचेरे भाई मनीष गोस्वामी ने एक इंटरव्यू में फिल्म ‘क्रांति’ से जुड़ी एक दिलचस्प घटना साझा की। इस घटना में उन्होंने बताया कि एक खास शॉट के लिए एक्ट्रेस परवीन बॉबी ने कुल 66 रीटेक दिए। यह शॉट रात दो बजे तक जारी रहा, लेकिन मनोज कुमार ने असाधारण धैर्य बनाए रखा और शूटिंग जारी रखी। मनीष गोस्वामी ने इस बातचीत में मनोज कुमार के परफेक्शन के प्रति जुनून की खुलकर चर्चा की।

मनीष गोस्वामी ने बताया कि मनोज कुमार कभी भी किसी भी चीज़ के लिए समझौता नहीं करते थे। अगर किसी सीन के लिए 30 से 50 रीटेक की आवश्यकता भी होती, तो मनोज कुमार हर बार सब्र के साथ उसे पूरा करने के लिए तैयार रहते थे। वे मूड को बनाए रखते हुए एक भी बार अपना आपा नहीं खोते थे। जोधपुर के एक महल में शूटिंग के दौरान परवीन बॉबी को ‘क्रांति जिंदाबाद’ कहते हुए दीवार पर हाथ उठाना था, लेकिन उन्‍हें उक्त शॉट की मांगों को समझने में समय लग गया, जिसके कारण 66 रीटेक की आवश्यकता पड़ी। यहाँ तक कि आखिरकार रात दो बजे शॉट सही हो पाया।

मनीष ने इसके साथ ही मनोज कुमार के सेट पर काम करने के माहौल और उनकी कार्यशैली पर भी रौशनी डाली। उन्होंने बताया कि यदि मनोज कुमार ने माथे पर रुमाल बांध रखा था, तो इसका अर्थ था कि वे किसी बात को लेकर दबाव में हैं। इस स्थिति में, सेट पर अन्य किसी को उनसे पैक अप के बारे में पूछने की अनुमति नहीं होती। उनकी अनुशासनप्रियता के कारण, अधिकतर शूटिंग अपने निर्धारित समय पर समाप्त होती थी।

मनीष गोस्वामी ने समय के पाबंद होने को लेकर मनोज कुमार की कठोरता को भी बयान किया। उन्होंने बताया कि वह समय की अहमियत को समझते थे और विशेष रूप से सुबह 9 बजे की शिफ्ट में समय पर आने वालो को छोड़ देते थे। लेकिन, यदि कोई व्यक्ति 9 बजे की शिफ्ट के लिए दोपहर 12 बजे आता था, तो उसे उसी समय जाने के लिए कहा जाता था। यह सब मनोज कुमार की सख्त अनुशासन को दर्शाता है, जिसके कारण वे अपने काम के प्रति अत्यधिक गंभीर थे।

इस प्रकार, मनोज कुमार का उसूल और उनके काम के प्रति समर्पण उन्हें अन्य निर्देशकों से अलग बनाता था। उनकी यादें और कार्यशैली न केवल उनके प्रशंसकों के दिलों में बल्कि फिल्म इंडस्ट्री में भी एक महत्वपूर्ण स्थान बनाएगी। उनके द्वारा स्थापित मानक और समर्पण से नए फिल्म उद्योग का मार्गदर्शन होगा। मनोज कुमार का योगदान और उनकी फिल्में हमेशा याद की जाएंगी।