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डेढ़ साल बाद टूटा ओमपुरी और सीमा का रिश्ता, तलाकशुदा स्त्री पर सीमा का खुलासा!

राइटर-डायरेक्टर सीमा कपूर की आत्मकथा ‘यूं ही गुजरी है अब तक’ हाल ही में प्रकाशित हुई है, जिसमें उन्होंने अपने जीवन के संघर्षों, अनुभवों और ओम पुरी के साथ अपने रिश्ते के बारे में अपने विचार साझा किए हैं। सीमा कपूर ने अपनी पुस्तक में ओम पुरी के साथ बिताए गए अपने अनमोल लम्हों और उनके कठिन समय का भी जिक्र किया है। इस आत्मकथा को लेकर हाल ही में सीमा कपूर ने दैनिक भास्कर के मुंबई कार्यालय में एक साक्षात्कार दिया, जिसमें उन्होंने अपने जीवन की कठिनाइयों और ओम पुरी के साथ संबंध के बारे में खुलकर बात की।

सीमा कपूर ने अपनी पहली मुलाकात का विवरण साझा करते हुए कहा कि उनकी पहली बार ओम पुरी से 1979 में हुई थी, जब वह बॉम्बे (वर्तमान मुंबई) आई थीं। ओम पुरी उस समय पृथ्वी थिएटर में नाटक ‘बिच्छू’ का रिहर्सल कर रहे थे, जिसका निर्देशन उनके बड़े भाई रंजीत कपूर कर रहे थे। उस समय ओम पुरी एक स्ट्रगलिंग कलाकार थे, जबकि उनके बड़े भाई एक सफल डायरेक्टर थे। सीमा कपूर ने यह भी बताया कि उस समय वे कॉलेज के पहले वर्ष की छात्रा थीं और ओम पुरी के साथ उनके संबंध किस प्रकार विकसित हुए।

सीमा कपूर ने अपने दुखद अनुभव के बारे में साझा किया कि 1992 में शादी के डेढ़ साल बाद ओम पुरी ने उन्हें छोड़ने का फैसला किया। ओम पुरी के जीवन में नंदिता नामक एक और महिला आ गई थीं, जिसके प्रति उनकी रुचि बढ़ गई थी। इस कठिन समय में सीमा कपूर प्रेग्नेंट थीं और ओम पुरी ने तलाक के पेपर भेज दिए थे। इस तनाव के कारण सीमा ने अपने गर्भ में बच्चे को खो दिया, लेकिन उन्होंने अपने दुख को अपने परिवार के साथ साझा नहीं किया, क्योंकि वे पहले से ही परेशान थे। ऐसे समय में, ओम पुरी को नंदिता के साथ फोन पर बात करते देखना भी बहुत दुखदाई था।

सीमा कपूर ने बताया कि तलाक उस समय समाज में एक कलंक माना जाता था, जिससे वह खुद को बहुत अपमानित महसूस कर रही थीं। उन्होंने यह नहीं समझ पाईं कि 11 साल के एक रिश्ते के बाद अचानक ऐसा क्या हुआ कि उनके विवाह के महज डेढ़ साल में यह रिश्ता टूट गया। उन्होंने पुरुष मानसिकता पर भी विचार किया कि कैसे पुरुष अपनी ओर आकर्षित होने वाली महिलाओं की ओर आकर्षित होते हैं और जब उन्हें प्राप्त कर लेते हैं, तो उनकी मूल्यवानता कम हो जाती है। सीमा ने स्पष्ट किया कि वह ओम पुरी को पाने के लिए लड़ाई नहीं करना चाहती थीं क्योंकि यह एक स्त्री का अपमान था।

सीमा के अनुसार, ओम पुरी के प्रति उनके प्रेम का अंत दुखद रहा, लेकिन उन्होंने खुद को उस रिश्ते से अलग कर लिया। उनका मानना था कि ओम पुरी को नंदिता के साथ खुश रहना चाहिए। समय के साथ सीमा कपूर ने ओम पुरी के साथ अपने रिश्ते के बाद के अनुभवों को साझा किया, जिसमें उन्होंने यह बताया कि ओम पुरी ने उनके कठिन समय के बाद अपनी गलती का एहसास किया और माफी मांगी। सीमा ने कहा कि वह गुस्सा और जख्म को लंबे समय तक अपने अंदर नहीं रखतीं और यही उनके जीवन का दर्शन है।

यह आत्मकथा न केवल सीमा कपूर के व्यक्तिगत अनुभवों का दस्तावेज है, बल्कि समाज में महिलाओं के प्रति मानसिकता और उनके संघर्षों को भी उजागर करती है। उन्होंने बताया कि तलाकशुदा महिलाओं को अक्सर भोग की वस्तु समझा जाता है, जबकि उन्हें सम्मान और मित्रता की जरूरत होती है। सीमा कपूर की यह किताब समाज की कुछ कठोर सच्चाइयों को उजागर करती है और पाठकों को एक नई दृष्टि प्रदान करती है।